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Aamool Kranti Ka Dhwaj-Vahak Bhagatsingh

Aamool Kranti Ka Dhwaj-Vahak Bhagatsingh

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  • Pages: 131p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789388211840
  •  
    भगतिंसह को यदि माक्र्सवादी ही कहना हो, तो एक स्वयंचेता या स्वातन्त्र्यचेता माक्र्सवादी कहा जा सकता है। रूढ़िवादी माक्र्सवादियों की तरह वे हिंसा को क्रान्ति का अनिवार्य घटक या साधन नहीं मानते। वे स्पष्ट शब्दों में कहते हैं—क्रान्ति के लिए सशस्त्र संघर्ष अनिवार्य नहीं है और न ही उसमें व्यक्तिगत प्रतिहिंसा के लिए कोई स्थान है। वह बम और पिस्तौल का सम्प्रदाय नहीं है।’अन्यत्र वे कहते हैं—हिंसा तभी न्यायोचित हो सकती है जब किसी विकट आवश्यकता में उसका सहारा लिया जाय। अिंहसा सभी जन-आन्दोलनों का अनिवार्य सिद्धान्त होना चाहिए।’ आज जब भगतसिंह के समय का बोल्शेविक ढंग समाजवाद मुख्यत: जनवादी मान-मूल्यों की निरन्तर अवहेलनाओं के कारण, समता-स्थापन के नाम पर मनुष्य की मूलभूत स्वतन्त्रता के दमन के कारण, ढह चुका है, यह याद दिलाना जरूरी लगता है कि स्वतन्त्रता उनके लिए कितना महत्त्वपूर्ण मूल्य था। स्वतन्त्रता को वे प्रत्येक मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार घोषित करते हैं। क्योंकि वे अराजकतावाद के माध्यम से माक्र्सवाद तक पहुँचे थे, इसलिए स्वतन्त्रता के प्रति उनके प्रेम और राजसत्ता के प्रति उनकी घृणा ने उन्हें कहीं भी माक्र्सवादी जड़सूत्रवाद का शिकार नहीं होने दिया।

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    Ranjeet

    डॉ. रणजीत

    जन्म : २० अगस्त, १९३७, ग्राम-कटार, जिला-भीलवाड़ा, राजस्थान.

    शिक्षा : अ‍म.ए. पीएच.डी., राजस्थान विश्वविद्यालय.

    प्रकाशन : हिन्दी की सभी स्तरीय पत्रिकाओं में। प्रसारण आकाशवाणी और दूरदर्शन के लखनऊ, इलाहाबाद, छतरपुर, श्रीनगर और जयपुर केन्द्रों से।

    प्रकाशित कृतियाँ : दस कविता संकलन, दो कहानी संकलन और तीन समीक्षा सम्बन्धी ग्रन्थ कुल मिलाकर तीस पुस्तकें प्रकाशित।

    सम्मान/पुरस्कार : उ.प्र. शासन से १९६९ में. सोवियत लैण्ड नेहरू अवार्ड १९७१ में. सितम्बर, १९७३ में अल्माअता, तत्कालीन सोवियत संघ में आमन्त्रित, पाँचवें अफ्रीकी एशियाई लेखक सम्मेलन में सोलह अन्य भारतीय भाषाओं के लेखकों के साथ भारत का प्रतिनिधित्व। राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा विशिष्ट साहित्यकार सम्मान १९८४, बिहार राजभाषा विभाग द्वारा केदारनाथ मिश्र ‘प्रभात’ पुरस्कार १९९१ तथा भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा अतिविशिष्ट गौतमबुद्ध सम्मान १९९७.

    अध्यापन : १९५९ से १९७० तक. पाली और वनस्थली विद्यापीठ बीकानेर, १९७० से १९९२ तक रीडर एवं अध्यक्ष हिन्दी विभाग, जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय, बाँदा में तथा १९९२ से १९९८ तक आर.अ‍म.पी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सीतापुर में।

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