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Alag Alag Vaitarni

Alag Alag Vaitarni

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  • Pages: 487p
  • Year: 2014, 8th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180312908
  •  
    प्रेमचंद के बाद ग्रामीण जीवन का चित्रण करनेवाले सफल कथाकारों में शिवप्रसाद जी अगली पंक्ति में आते हैं ! अपने इस वृहद् उपन्यास में उन्होंने उत्तर प्रदेश के करैता गाँव को समस्त भारतीय गावों के प्रतिनिधि के रूप में ग्रहण करके अत्यंत यथार्थवादी एवं विचारोत्तेजक चित्रण प्रस्तुत किया है ! स्वतंत्रतता आई, जमींदारी टूटी ! करैता के किसानों को लगा कि दिन फिरेंगें ! मगर हुआ क्या ! अलग-अलग वैतरणी ! अलग-अलग नर्क ! इसे निर्मित किया है भूतपूर्व जमींदारी ने, धर्म तथा समाज के पुराने ठेकेदारों ने, भ्रष्ट सरकारी, ओहदेदारों ने जो इस वैतरणी में जूझ और छटपटा रही है गाँव की प्रगतिशील नयी पीढ़ी ! निश्चय ही यह कृति हिंदी उपन्यास साहित्य की एक उपलब्धि है !

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    Shivprasad Singh

    19 अगस्त, 1928 को जलालपुर, जमानिया बनारस में पैदा हुए शिवप्रसाद सिंह ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 1953 में हिन्दी में एम.ए. किया। 1957 में पी-एच.डी. करने के बाद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में ही प्राध्यापक नियुक्त हुए।

    शिवप्रसाद सिंह प्रख्यात शिक्षाविद् तो थे ही, साहित्य के भी शिखर पुरुष रहे हैं। ‘नयी कहानी’ आन्दोलन के स्तंभ शिवप्रसाद जी प्राचीन और समकालीन साहित्य से गहरे सम्पर्कित रहे हैं।

    कुछ समालोचक उनकी कथा-रचना ‘दादी माँ’ को पहली ‘नयी कहानी’ मानते हैं।

    कृति संदर्भ:

    उपन्यास: अलग-अलग वैतरणी, नीला चाँद, मंजुशिमा, शैलूष।

    कहानी-संग्रह: अंधकूप (सम्पूर्ण कहानियाँ, भाग-1), एक यात्रा सतह के नीचे (सम्पूर्ण कहानियाँ, भाग-2)

    आलोचना: कीर्तिलता और अवहट्ठ भाषा, आधुनिक परिवेश और नवलेखन, आधुनिक परिवेश और अस्तित्ववाद।

    निबन्ध-संग्रह: मानसी गंगा, किस-किसको नमन करूँ, क्या कहूँ कुछ कहा न जाए।

    जीवनी: उत्तरयोगी (महर्षि अरविन्द)

    निधन: 28 सितम्बर, 1998

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