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Alochak Ke Notes

Alochak Ke Notes

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  • Pages: 206
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789388211222
  •  
    ‘आलोचक के नोट्स' गणेश पाण्डेय क्री आलोचना की नयी किताब है । उनकी आलोचना अपने समय के साहित्यक परिदृश्य पर एक जरूरी हस्तक्षेप है । आलोचना से रचना और रचना से आलोचना का काम लेना लेखक की खूबी है । उनके लिए आलोचना का मतलब पाठकों के भीतर ज़रूरी बेचैनी और सवाल पैदा करना है । इसीलिए अपनी आलोचना में सुंदर कविता बरक्स मज़बूत कविता का सवाल उठाते हैं । वे अपने समय की रचना और आलोचना की दुनिया की निर्मम चीरफाड़ करना, साहित्य के सुदीर्घ और स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी मानते हैं रचना और आलोचना, दोनों की प्रवृतियों और विचलन पर नज़र रखते हैं । यह बताना जरूरी है कि कवि के रूप में भी गणेश पाण्डेय एक पल के लिए भी आलोचक के दायित्व मुक्त नहीं होते । जैसे उनके दिमाग में कोई पेंसिल है, आप से आप नोट करती रहती है, कवि और आलोचक की कारस्तानी । उनकी आलोचना हिन्दी की प्रशंसामूलक आलोचना का विकास ऩहीं हैं । वे आलोचना में उद्धरणों की कबूतरबाजी और कतऱऩबाजी में विश्वास नहीं करतें हैं, बल्कि उसका जमकर विरोध करते हैं, उसे आलोचना की मुंशीगीरी कहते हैं । आलोचना अपने विस्तार में नहीं, कई बार सूत्रों में ज्यादा महत्वपूर्ण होती है । आलोचना में छोटी और लक्ष्यकेंद्रित टिप्पणियाँ ज्यादा मूल्यवान होती हैं । रचना और आलोचना के कोनें-अंतरे में छिपे अंधेरे पर आलोचक की उठी हुई एक उंगली, किसी किताब, लेखकों की किसी पीढ़ी, किसी समूह, किसी सूची की आंख मूंदकर की गयी महाप्रशंसा को चीर देती है । पाठक अनुभव करेंगें कि "आलोचक के नोट्स" के लेख और नोट्स उन्हें अपनी तर्कशीलता सर्जनात्मकता और चुंबक जैसी भाषा से अपना बना लेंगे, ऐसी पठनीयता विरल है ।

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    Ganesh Pandey

    गणेश पाण्डेय
    जन्म : 13 जुलाई, 1955 को तेतरी बाजार, सिद्धार्थनगर (तत्कालीन जनपद बस्ती)

    शिक्षा : आरंभिक शिक्षा वहीँ और आसपास | उच्च शिक्षा के लिए गोरखपुर आगमन | गोरखपुर विश्विद्यालय से हिंदी में एम्.ए. की उपाधि | और यहीं से 'आठवें दशक की हिंदी कहानी में ग्रामीण जीवन' विषय पर डाक्टरेट |

    गतिविधियाँ : जीविका की शुरुआत में कुछ वक्त पत्रकारिता से सम्बद्ध | कुछ समय उद्योग विभाग में सहायक प्रबंधक के रूपमे सरकरी नौकरी | सन 1987 में गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति, सुदीर्घ सेवा के बाद प्रोफेसर के रूप में यहीं से अवकाश | विश्वविद्यालय में पूर्व अधिष्ठाता छात्रकल्याण और शिक्षक राजनीती में लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए लम्बे संघर्ष के फलस्वरुप यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में भी योगदान | साहित्यिक पत्रिका 'यात्रा' का संपादन | इन्टरनेट पर ब्लॉग |

    साहित्य सेवा :

    कविता संग्रह अटा पड़ा था दुःख का हाट, जल में, जापानी बुखार, परिणीता | उपन्यास-अथ उदल कथा, रीफ | कहानी संग्रह-पीली पत्तियां, शोध-आठवें दशक की हिंदी कहानी आलोचना-रचना, आलोचना और पत्रकारिता, आलोचना का सच, आलोचक के नोट्स, नयी सदी की कविता प्रकाशित |

    संपर्क : 839-सी, लच्छीपुर ख़ास, राजेंद्रनगर पूर्वी, गोरखपुर-273015

    इमेल - prof.ganeshpandey@gmail.com

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