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Aalochana Ka Sach

Aalochana Ka Sach

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  • Pages: 224p
  • Year: 2015
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180319891
  •  
    कवि-आलोचक गणेश पाण्डेय की आलोचना का रंग अलग है। एक खास तरह की निजता गणेश पाण्डेय की आलोचना की पहचान है। उनकी आलोचना नये प्रश्न उ'ाती है। उनकी आलोचना साहित्यिक मुक्ति की बात करती है। यह पहली बार है। ‘आलोचना का सच’ कविता की पहुँच की समस्या पर तो विचार करती ही हैै, कवि और आलोचक के ईमान और साहस को भी कविता और आलोचना की कसौटी परखती है। इनके लिए आलोचना का अर्थ उसके पा'क-केन्द्रित और रचना-केन्द्रित होने में निहित है। यह आलोचना समकालीन आलोचना से गम्भीर असहमति रखती है। गणेश पाण्डेय की आलोचना एक अर्थ में समकालीन आलोचना का प्रतिपक्ष है। मुहावरे सिर्पâ कविता में ही नहीं बनते हैं, एक ईमानदार आलोचक अपनी आलोचना का मुहावरा खुद गढ़ता है। गणेश पाण्डेय अपनी आलोचना का मुहावरा खुद बनाते हैं। आलोचना की सर्जनात्मक भाषा का जो प्रीतिकर वितान खड़ा करते हैं, बिलकुल नया है। और हमारे समय की निर्जीव आलोचना को नयी चाल में ढालने का काम करते हैं। गणेश पाण्डेय की यह किताब पुस्तक समीक्षाओं का जखीरा नहीं है, बल्कि पुस्तक समीक्षाओं के आतंक और आलोचना के नाम पर 'स अप'नीय गद्य से पा'क को मुवत करने की एक दिलचस्प और यादगार कोशिश है।

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    Ganesh Pandey

    गणेश पाण्डेय
    जन्म : 13 जुलाई, 1955 को तेतरी बाजार, सिद्धार्थनगर (तत्कालीन जनपद बस्ती)

    शिक्षा : आरंभिक शिक्षा वहीँ और आसपास | उच्च शिक्षा के लिए गोरखपुर आगमन | गोरखपुर विश्विद्यालय से हिंदी में एम्.ए. की उपाधि | और यहीं से 'आठवें दशक की हिंदी कहानी में ग्रामीण जीवन' विषय पर डाक्टरेट |

    गतिविधियाँ : जीविका की शुरुआत में कुछ वक्त पत्रकारिता से सम्बद्ध | कुछ समय उद्योग विभाग में सहायक प्रबंधक के रूपमे सरकरी नौकरी | सन 1987 में गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति, सुदीर्घ सेवा के बाद प्रोफेसर के रूप में यहीं से अवकाश | विश्वविद्यालय में पूर्व अधिष्ठाता छात्रकल्याण और शिक्षक राजनीती में लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए लम्बे संघर्ष के फलस्वरुप यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में भी योगदान | साहित्यिक पत्रिका 'यात्रा' का संपादन | इन्टरनेट पर ब्लॉग |

    साहित्य सेवा :

    कविता संग्रह अटा पड़ा था दुःख का हाट, जल में, जापानी बुखार, परिणीता | उपन्यास-अथ उदल कथा, रीफ | कहानी संग्रह-पीली पत्तियां, शोध-आठवें दशक की हिंदी कहानी आलोचना-रचना, आलोचना और पत्रकारिता, आलोचना का सच, आलोचक के नोट्स, नयी सदी की कविता प्रकाशित |

    संपर्क : 839-सी, लच्छीपुर ख़ास, राजेंद्रनगर पूर्वी, गोरखपुर-273015

    इमेल - prof.ganeshpandey@gmail.com

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