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Bahas Ke Muddey

Bahas Ke Muddey

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  • Pages: 161p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789389243512
  •  
    इस पुस्तक में आजकल चल रहे बहस के मुद्दों पर लेख संकलित है। ये मुद्दे लम्बे समय से बने रहे हैं, किन्तु केन्द्र में अभी आये हैं। २०१४ से पहले राजनीति या समाज हाबी रहता था, उसके बाद समाज पर राजनीति हावी हो गयी है। इसका आरम्भ आपातकाल के दौरान ही हो गया था पर वर्चस्व अब बना है। जब समाज हावी था, तब समाजवाद निश्चित अर्थव्यवस्था, धर्म निरपेक्षता, समानता, स्वतन्त्रता, दलितवाद, पिछड़ावाद, आदिवासी विमर्श स्त्रीवाद आदि का बोलबाला था। (इसमें आदिवासी विमर्श का पूरा विकास नहीं हो पाया था, अब हो रहा है।) अयोध्या की घटना के बाद सांस्कृतिक राष्ट्रवाद आया और उससे जुड़े तमाम दीगर मुद्दे। अब माना जाने लगा है कि कोई एक बात वर्चस्व बनाकर चल सकती है तो वह है ‘हिन्दुत्व’। उसके लिए निर्वचन और उत्तर सत्य का सहारा लिया जा रहा है। भुला दिया जा रहा है कि इस बहुलतावाले देश में कोई बात देशकाल-परिस्थिति के अनुसार प्रमुख तो हो सकती है ‘डामिनेण्ट’ नहीं। इधर सरकार बदलने के बाद जो बहस के मुद्दे पीछे चले गये थे, वे फिर केन्द्र में आ गये हैं और कुछ नये मुद्दे उभर आये हैं। ऐसे ही नौ मुद्दे, जैसे हिन्दुइज्म, हिन्दुत्व, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, सामाजिक अभियंत्रण, उत्तर सत्य का प्रभाव, विकास का गुजरात मॉडल, जनजातीय विमर्श का आधार वगैरह की चर्चा इस पुस्तक में है। वहाँ जो तर्वâ-वितर्वâ रखे गये हैं, वे पाठकों को प्रबुद्ध तो करेंगे ही, अपना पक्ष चुनने में ही मदद करेंगे। उम्मीद है यह पुस्तक प्रबुद्ध और सामान्य दोनों ही तरह के पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

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    Shriprakash Mishra

    श्रीप्रकाश मिश्र
    श्रीप्रकाश मिश्रके अब तक पाँच कविता संग्रह : मौन पर शब्द (1986), शब्द के बारीक तारों से (2009), शब्द संभावनाएँ है (2012), मिअमाड़ (2015), कि जैसे होना खतरनाक संकेत (2017), चार उपन्यास : जहाँ बांस फूलते हैं (1996), रूपतिल्ली की कथा (2006), जो भुला दिये गये (2013), आपरेशन खुदाबख्श (2015), चार आलोचना की पुस्तकें : यह जो आ रहा है हरा (1992), यूरोप के आधुनिक कवि (2011), चुग की नब्ज (2012), रचना का सच (2013) के अलावा चिन्तन की दो पुस्तकें : सोच की दृग छाया (2017) और उत्तर आधुनिक अवधारणाएं (2018) प्रकाशित है । ग्राम जड़हा जिला कुशीनगर (उ.प्र.) के निवासी श्रीप्रकाश मिश्र एम.ए. ( राजनीति शास्त्र) और एल-एल.एम हैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय से । विद्यार्थी जीवन में छात्र राजनीति में सक्रिय रहे । बांग्ला देश की आजादी की लडाई में मुक्तिवाहिनी के साथ रहे । केन्द्र सरकार की सेवा में रहते हुए उत्तर-पूर्व, कश्मीर, भूटान, बांग्ला देश आदि में रहे । अब इलाहाबाद में रहते हैं और कविता की अनियतकालीन पत्रिका ‘उन्नयन' का संपादन/प्रकाशन करते है । रामविलास शर्मा सम्मान के संस्थापक व पुरस्कर्ता है ।

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