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Basweshwar

Basweshwar

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  • Pages: 120p
  • Year: 2006
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 10: 8180310817
  •  
    कन्नड़ साहित्य इतिहास की धारा में बारहवीं सदी का वचन साहित्य-युग सच्चे अर्थों में ' स्वर्ण -युग ' कहलाता है । इस काल विशेष में कन्नड़ के कवि-कवयित्रियों ने जो शिवशरण और शिवशरणियाँ कहलाते हैं; कविता की रचना सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दोलन के लिए की है । काव्यकर्म इनके लिए साधन मात्र था, न कि साध्य । लगभग सैकड़ों शरण कवि-कवयित्रियों ने समकालीन काल संदर्भ में, व्यष्टि और समष्टि हित को समान रूप से महत्व देते हुए वचन साहित्य की रचना की थी । आज भी लगभग सैकड़ों शिवशरण और पैं तीस से बढ्‌कर शिवशरणियों का वचन साहित्य उपलब्ध होना आश्चर्यं का कारण बन सकता है । स्त्री मुक्ति, जातिवाद का नाश, धर्म के क्षेत्र में लोकतन्त्र तत्त्व की स्थापना, श्रम संस्कृति की श्रेष्ठता एवं सब प्रकार की समानता, कथनी करनी का सुन्दर समन्वय, मनुष्य केन्द्रित जीवन चिंतन इनके काव्य की प्रमुख आवाज थी । समानता ही इनके लिए योग था । इसलिए विश्वास भरी एवं ऊँची आवाज में यह कहा जा सकता है कि विश्व साहित्य पंक्ति में कन्नड के वचन साहित्य को खुले दिल से रखा जा सकता है ।

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    Kashinath Ambalge

    डॉ. काशीनाथ अंबलगे

    जन्म: 1947। मुचलंब। जिला बीदर।

    शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी); एम.ए. (कन्नड़); पी-एच.डी.।

    रचनाएँ: कन्नड़ - काव्य-मूवत्तैदु कनवगळु, इन्नष्टु कवनगळु, हुल्लुमेलिन हनिगळु, कौदी, चुळुकादिरय्य, बेउ बेल्ल, मूवत्तक्के मुभूरु, शरणुशरणार्थी गज़लगळु, हाडुशळु उकदाव, समकालीन पंजाबी कवितेगळु, कोगिले अळुनिदे (अनु.), ओदि अळुवदु (अनु.)। गद्य-कबीरदासरू, शरणरू हागु संतर सामाजिक काळजि, सौंदर्यशास्त्र (अनु.), सफदर हाशमी मक्कल नाटकगळु, महिला वचन, शब्दद बेड़गु, रामजी, जाग्रतनाद, अध्यक्षीय भाषण आदि। हिन्दी - अधूरे शब्द (काव्य-संग्रह), बसवेश्वरः काव्य शक्ति और सामाजिक शक्ति, वचन साहित्य और संत साहित्य का समाजशास्त्र, 12वीं सदी की कवयित्री अक्कमहादेवी और स्त्री-विमर्श, संत और शरणों के काव्य में सामाजिक चेतना, बसवादि शरणों के काव्य में सामाजिक चेतना, बसव चेतना (अनु), चंद्रगिरि के किनारे, शिवयोगी सिद्धरामेश्वर के 208 वचन, क्रान्ति आई क्रान्ति, सपनों का गीत क्यूबा आदि। कन्नड़, हिन्दी एवं दोनों में अनुवाद सहित लगभग चालीस ग्रन्थ।

    सम्मान, सदस्यत्व: ‘अधूरे शब्द’ को तीन पुरस्कार - केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय का पुरस्कार, गुलबर्गा विश्वविद्यालय राज्योत्सव पुरस्कार और बेंगलोर विश्वविद्यालय महात्मा गांधी हिन्दी पुरस्कार। ‘कौदी’ को पद्मश्री मल्लिकार्जुन मंसूर प्रतिष्ठान पुरस्कार और ‘इन्नष्टु कवनगळु’ को गु.वि.वि. राज्योत्सव पुरस्कार।

    सदस्य: कर्नाटक साहित्य अकादमी, 95-98, सचिव, कन्नड़ साहित्य परिषद्, अध्यक्ष, समुदाय गुलबर्गा, 95-97, अध्यक्ष, कन्नड़ साहित्य सम्मेलन बीदर, फिलहाल सदस्य कन्नड़ पुस्तक प्राधिकार कर्नाटक सरकार।

    सम्प्रति: प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, गुलबर्गा विश्वविद्यालय।

    सम्पर्क: ‘बेउ-बेल्ल’, 3-38, जयनगर

    विश्वविद्यालय मार्ग, गुलबर्गा-585105

    मो. 09449619162

    ई-मेल: kashinathambalge@yahoo.com

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