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Bhakti Andolan Aur Bhakti Kavya

Bhakti Andolan Aur Bhakti Kavya

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  • Pages: 304p
  • Year: 2010
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180314919
  •  
    प्रस्तुत पुस्तक का सम्बन्ध भक्ति-आन्दोलन और भक्ति-काव्य से है, भक्ति-आन्दोलन के मूल में जनता के दुःख-दर्द ही हैं और उन दुःख-दर्दों को बड़ी जिवंत मानवीयता के साथ उभरने, उनसे एकमेक होकर सामने आने में ही भक्ति-आन्दोलन की शक्ति को देखा जा सकता है ! अनुमान कर सकते है कि तीन शताब्दियों से भी अधिक समय तक अपने पूरे वेग के साथ गतिशील होने वाले इस भक्ति-आन्दोलन में जनता के ये दुःख-दर्द कितनी गहरी संवेदनशीलता के सानिध्य में उभरे होगें ! भक्तिकाव्य में, उसके रचनाकारों में, अंतर्विरोध भी हैं, उनकी सीमाएँ भी हैं ! पुस्तक में उनकी चर्चा भी की गई है ! हम भक्तिकाव्य जैसा काव्य आज नहीं चाहते, पर जिन मूलवर्ती गुणों के कारण भक्तिकविता कालजयी हुई, वे गुण जरूर उससे लेना चहेते हैं, और इन गुणों के नाते ही हम उसे साथ लेकर चलना भी चाहते है ! पुस्तक में निबंधों में पुनरुक्ति भी मिल सकती है ! अलग-अलग समय में लिखे गए निबंध ही मिलजुल कर यह किताब बना रहे हैं ! इनमे से कबीर, सूर तथा भक्ति-आन्दोलन के सुसरे निबंध प्रकाशित भी हो चुके हैं ! यहाँ वे कुछ संशोधित परिवात्द्धित रूप में फिर से प्रकाशित हो रहे हैं ! मालिक मुहम्मद जायसी, तुलसी, भक्ति-आन्दोलन का पहला निबंध अप्रकाशित है ! वे यहाँ पहली बार ही प्रकाशित हो रहे हैं ! नानकदेव तथा गुरु गोविन्दसिंह पर लिखे निबंध भी अप्रकाशित हैं ! ये विशेष अवसर के लिए लिखे गए निबंध थे, किन्तु किताब के विषय की सीमा में आ सकने के नाते उन्हें भी समेट लिया गया है ! भक्ति-आन्दोलन सम्बन्धी निबंधो में प्रमुखतः के दामोदरन, आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामचंद्र शुक्ल तथा गजानन माधव मुक्तिबोध के विचारों को ही रेखांकित किया गया है !

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    Shivkumar Mishra

    शिवकुमार मिश्र

    जन्म : 2 फरवरी 1931, कानपुर (उ.प्र.) !

    शिक्षा : एम्.एम्. तक की शिक्षा, कानपुर में ! पी.एच-डी. तथा डी. लिट्. सागर विश्वविद्यालय, सागर, म.प्र. से !

    गतिविधियाँ : सन 1959 से सन 1977 तक सागर विश्वविद्यालय में तथा उसके उपरांत 1991 ई. तक सरदार पटेल विश्वविद्यालय, वल्लभ विद्यानगर (गुजरात) में अध्यापन ! भारत सरकार की सांस्कृतिक आदान-प्रदान योजना के तहत 1991 ई. में 15 दिन की सोवियत यूनियन की सांस्कृतिक यात्रा ! राष्ट्रीय अध्यक्ष : जनवादी लेखक संघ !

    साहित्यिक सेवा : 'नया हिंदी काव्य', 'प्रगतिवाद', मार्क्सवादी साहित्य-चिंतन', 'यथार्थवाद', 'प्रेमचंद : विरासत का सवाल', आचार्य शुक्ल और हिंदी आलोचना की परंपरा', 'भक्ति आन्दोलन और भक्ति काव्य', 'मार्क्सवाद देव्मुर्तियाँ नहीं गढ़ता', 'आधुनिक कविता और युग-सन्दर्भ', 'इतिहास, साहित्य और संस्कृति'सहित साहित्य-समीक्षा से सम्बंधित 17 पुस्तकों का लेखन ! साहित्य समीक्षा से सम्बंधित आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी की चार पुस्तकों तथा विदेशी लेखकों की चार पुस्तकों का संपादन-पुनःप्रस्तुति !

    पुरस्कार : 'मार्क्सवादी साहित्य-चिंतन' पुस्तक पर सन 1975 ई. में सोवियत-लैंड नेहरु एवार्ड !

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