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Bhasha Vigyan : Hindi Bhasha Aur Lipi

Bhasha Vigyan : Hindi Bhasha Aur Lipi

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  • Pages: 438p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180311765
  •  
    सभ्यता और संस्कृति के विकास के साथ भाषा प्रयोग के आयाम में विस्तार एवं सूक्ष्मता आयी है । अपने सामाजिक परिवेश में सहज ढंग से सीखी गई मातृभाषा के द्वारा बृहत्तर विश्व-समाज के साथ सम्पर्क स्थापित करना संभव नहीं है । विश्व-समाज में भाषा व्यवहार के विविध संदर्भों को समझने के लिए भाषा-विज्ञान का अध्ययन आवश्यक हो गया है । भाषा की विविध प्रयुक्तियों, भाषा-चिन्तन की परम्परा, भाषा-संरचना के तत्वों, ध्वनि, शब्द, पद, अर्थ आदि क्षेत्रों-में सम्पन्न भाषा वैज्ञानिक आधुनिकतम विचारों तथा निष्पत्तियों को एक साथ समाहित करने वाली यह पुस्तक छात्रों, अनुसंधानकर्त्ताओं तथा अन्य जिज्ञासुओं के लिए उपादेय होगी । हिन्दी-भाषा तथा लिपि पर भी इसमें बड़े विस्तार से विचार किया गया है । विषय को सुबोध बनाने के लिए परिचित उदाहरणों का सहारा लिया गया है, विषय की गंभीरता तथा स्तर को सुरक्षित रखते हुए सरल, सुबोध भाषा शैली अपनाई गई । विवेचन क्रम में व्यर्थता का त्याग तथा आवश्यक सामग्री के ग्रहण का प्रयत्न रहा है । इसी आधार पर पुस्तक के कलेवर को संयमित किया गया है ।

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    Ramkishor Sharma

    प्रो. रामकोशोर शर्मा

    जन्म : 9-10-1949 को भैरोपुर, सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश में)

    शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से, डी.फिल की उपाधि।

    गतिविधियाँ : 1979 से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में कार्यरत, प्रवक्ता, उपाचाय (रीडर) आचार्य एवं अध्यक्ष पद का दायित्व सम्हालते हुए सम्प्रति सेवानिवृत, स्वतंत्र लेखन । अनेक शोध छात्रो एवं छात्राओं को डी.फिल उपाधि के लिए कुशल निर्देशन ।

    साहित्य-सेवा : निम्नलिखित पुस्तके प्रकाशित:

    अपभ्रंश मुक्तक काव्य और उसका हिन्दी पर प्रभाव, हिन्दी साहित्य का इतिहास, हिन्दी भाषा का विकास, आधुनिक भाषा विज्ञान के सिद्धान्त, भाषा विज्ञान, हिन्दी भाषा और लिपि, आधुनिक कवि, प्रेमचन्द की कहानियाँ : संवेदना और शिल्प, प्रयोजनमूलक हिन्दी, भाषा चिन्तन के नये आयाम, कबीरवाणी : कथ्य और शिल्प,

    गौरी (उपन्यास), हिन्दी साहित्य का समग्र इतिहास ।

    सम्पादन : सम्मेलन पत्रिका (यू.जी.सी. मान्य शोध पत्रिका)

    पद-प्रतिष्ठा : पूर्व प्रबन्ध मती, उपसभापति, भारतीय हिन्दी परिषद, इलाहाबाद, उपाध्यक्ष, साहित्यकार संसद, इलाहाबाद, साहित्य मंत्री-हिन्दी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद ।

    सम्मान : अक्षयवट, हिन्दुस्तानी अकादमी, नागरी प्रचारिणी सभा आदि संस्थाओं द्वारा सम्मानित । भारत के अनेक विश्वविद्यालयों, लोक सेवा आयोगों में शैक्षणिक एवं मूल्यांकन सम्बन्धी, कार्यों में सहयोग | लगभग 50 राष्ट्रीय, अन्तर्राट्रीय संगोष्ठियों में भागीदारी। अनेक पुरस्कार समितियों के निर्णायक मंडल के सदस्य ।

    सम्पर्क : 408-ए/15-जी, बक्शीखुर्द, प्रयागराज

    पिनकोड-211006 (उ.प्र.)

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