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Vaidik Sanskriti

Vaidik Sanskriti

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  • Pages: 651p
  • Year: 2019, 4th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180310647
  •  
    भारतीय परम्परा में वेद को अनादि अथवा ईश्वरीय माना गया है । इतिहास और संस्कृति के विद्यार्थी के लिए इनमे भारतीय एवं आद्यमानव परम्परा की निधि है । महर्षि यास्क से लेकर सायण तक वेद के पंडितों ने इनके अनेक अर्थ निकाले हैं, जिसके कारण वेदों की सही व्याख्या कठिन है । आधुनिक युग में वेदों पर जो भी प्रसिद्ध ग्रंथ लिखे गये है उनमें इतिहास की दृष्टि से व्याख्या भले ही की गयी हो लेकिन आध्यात्मिक और सनातन अर्थ उपेक्षित है पुरानी भाषाशास्त्रीय व्याख्या के स्थान पर नयी पुरातात्त्विक खोज के द्वारा वेदों का' जो इतिहास पक्ष बदला है उसका मूल्यांकन भी यहाँ किया गया है! इस ग्रन्थ में न केवल मैक्समूलर आदि को नयी व्याख्याएं एवं सायण आदि की यज्ञपरक व्याख्या पर, बल्कि दयानन्द, श्रीअरविन्द, मधुसूदन ओझा आदि की संकेतपरक व्याख्या पर भी विचार किया गया है । वैदिक संस्कृति की परिभाषा करनेवाले ऋत-सत्यात्मक सूत्रो की विवेचना एवं किस प्रकार वे भारतीय सभ्यता के इतिहास में प्रकट हुए है इस पर भी चिन्तन किया गया है । वैदिक संस्कृति, धर्म, दर्शन और विज्ञान की अधुनातन-सामग्री के विश्लेषण में आधुनिक पाश्चात्य एवं पारम्परिक दोनों प्रकार की व्याख्याओं की समन्वित समीक्षा इस पुस्तक में की गयी है । इस प्रकार तत्व जिज्ञासा और ऐतिहासिक के समन्वयन के द्वारा सर्वांगीणता की उपलब्धि का प्रयास इस ग्रन्थ की विचार शैली का मूलमन्त्र और प्रणयन का उद्देश्य है ।

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    Govind Chandra Pandey

    गोविन्द चन्द्र पाण्डे

    प्रो0 गोविन्द चत्र पाण्डे इतिहास, संस्कृति और दर्शन के सुविख्यात चिन्तक हैं । पिछले पाँच दशक से आपकी लेखनी इन विषयों पर निरन्तर क्रियाशील रही है । संस्कृत और हिन्दी साहित्य, इतिहास, संस्कृति और दर्शन के क्षेत्र में अपने बहुविध योगदान के लिए विद्यावारिधि साहित्य वाचस्पति वाक्‍कपति महामहोपाध्याय और डॉक्टर आवॅ लैटर्स की मानद उपाधियों से नवनालन्दा महाविहार, नालन्दा; हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग; केन्द्रीय उच्चतर तिब्बती अध्ययन संस्थान, सारनाथ; लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ, नयी दिल्ली तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसीने अलंकृत कियाहै ।
    भारतीय परम्परा के मूल स्वर बौद्ध धर्म के विकास का इतिहास मूल्य मीमांसा साहित्य संस्कृति और सौन्दर्य इतिहास स्वरूप और सिद्धान्त शंकराचार्य : विचार और सन्दर्भ भारतीय समाज ऐतिहासिक और तात्विक विवेचना आदि इनके ग्रंथ जहाँ हिन्दी में प्रकाशित हुए हैं, वहीं फाउन्डेशन्स ऑफ इण्डियन कल्वर (दो जिल्द), अएरिजिन्स ऑफ बुद्धिज्म डॉन ऑफ इण्डियन सिविलाइजेशन आदि कृतियाँ अंग्रेजी में प्रकाशित हैं । अस्‍ताचलीयम भक्‍तिदर्शन विमर्श; सौन्दर्यदर्शन विमर्श: एक सद्द विप्रा बहुश वदन्ति अग्निबीज क्षण और लक्षण हासका तथा जया आदि के प्रणयन द्वारा प्रो० पाण्डे ने संस्कृतं और हिन्दी भाषा और साहित्य को भी अपना अमूल्य योगदान दिया है ।
    प्रोत. पाण्डे अपनी रचनाओं पर अनेकानेक पुरस्कारों से भी सम्मानित किये जाते रहे हैं जिनमें शंकर पुरस्कार मंगलाप्रसाद पारितोषिक और विज्ञान-दर्शन पुरस्कार के नाम उल्लेखनीय हैं ।
    राजस्थान एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आचार्य- अध्यक्ष एवं कुलपति रह चुके प्रीत पाण्डे सम्प्रति इलाहाबाद संग्रहालय समिति, इलाहाबाद; भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला एवं केन्द्रीय उच्चतर तिब्बती अध्ययन संस्थान, सारनाथ के अध्यक्ष पद पर आसीन रहते हुए भी अनेक ग्रंथों के लेखन और सेन्टर फाॅर, स्टडीज इन सिविलाइजेशन्स के लिए सम्पादनमें निरन्तर व्यस्त हैं ।

    निधन : 22 मई, 2011

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