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Anand Karaj

Anand Karaj

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  • Pages: 151p
  • Year: 2014
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180318474
  •  
    बलवंत सिंह सरीखे अनुभवी कथाकार से ही मुमकिन था कि किसी बहुत पुरानी कहानी को भी नये – नवेले, अनूठे और समसामयिक अंदाज में पाठकों के सामने ले आयें ! कहानी ‘दंड’ में बिना कहे प्रेमिका के दर्द को समझनेवाला प्रेमी हो या प्रेमिका के लिखे आखिरी ख़त को खोलकर न देखनेवाला प्रेमी, जिसने दृढनिश्चय किया था कि वह अपनी प्रेम-कहानी को अंत तक कभी नहीं पहुँचाने देगा-जीवनपर्यन्त ! दोनों ही कहानियों में निहित प्रेम की भिन्न परिभाषाएं नितांत एकांत पल में हद के भीतर इस प्रकार के प्रेमी को पाने की आकांक्षा जाग्रत करती हैं ! इंसानी रिश्तो की जिस बारीकियों को बलवंत जी ने भाषा की सरलता में उतार दिया है वह अदभुत है ! आज की इस भागती-दौड़ती जिंदगी में फुर्सत के इतने निजी पल असंभव से लगते हैं ! लेकिन बलवंत सिंह की कहानियां आशा के उस दीप की तरह हैं जो अपनी बेहद सीढ़ी और सरल भाषा में हमें बताती हैं कि जीवन की असली खुशियाँ उन छोटे-छोटे पलों में ही छिपी हैं जो रोज हमारे आस-पास से गुजरती रहती हैं ! बलवंत जी की कहानियों के पात्र वही पुराने हैं, पर उन्हें देखने, आंकने टांकने का अंदाज बिलकुल नया है ! हमारे आस-पास की घटनाओं का बयान करती यह कहानियां समकालिक जीवन-छवियों से जोड़ने का एक सफल प्रयास करती हैं !

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    Balwant Singh

    जन्म : 1925,  गुजराँवाला, पश्चिमी पंजाब (अब पाकिस्तान) ।

    शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक।

    हिंदी कथा-साहित्य में अकेले ऐसे कृतिकार जिन्होंने पंजाब के ऐतिहासिक काल से लेकर आधुनिक मनोभूमि के विराट चित्र अपनी कृतियों में प्रस्तुत किए हैं। इनकी कितनी ही औपन्यासिक कृतियों को महाकाव्य कहा जा सकता है। जनजीवन के सामाजिक यथार्थ की ऐसी विश्वसनीयता हिंदी साहित्य में प्रायः विरल है। परिवेश ऐतिहासिक हो या समसामयिक - उनकी रचनाओं में संवेदना का तरल प्रवाह विद्यमान है । 12-13 वर्ष की आयु में पहली गद्य रचना । 1964 तक व्यवसाय।

    प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें : रात चोर और चाँद, काले कोस, रावी पार, सूना आसमान, साहिबे-आलम, राका की मंज़िल, चकपीराँ का जस्सा, दो अकालगढ़, एक मामूली लड़की, औरत और आबशार, आग की कलियाँ, बासी फूल (उपन्यास); पहला पत्थर, चिलमन, मेरी प्रिय कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ (कहानियाँ); अमृता प्रीतम (आलोचना)।

    निधन: 27 मई, 1986

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