• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Chhayawadi Kavya Ka Vyavaharik Saudaryashastra

Chhayawadi Kavya Ka Vyavaharik Saudaryashastra

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 200

Special Price Rs. 180

10%

  • Pages: 340p
  • Year: 1993
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: CKKVS75
  •  
    छायावाद आधुनिक हिन्दी कविता का शिखर है । साहित्य सौन्दर्य की, शुद्ध कविता की और वृहत्तर मानव मूल्यों की सर्वश्रेष्ठ साधना इस युग में प्रतिफलित हुई है । इससे बड़ा फलक और किसी पूर्ववर्ती-परवर्ती युग धारा को नहीं मिला है । इस काव्य की सर्वोच्च सिद्धि है-साहित्येतर अव- धारणाओं से काव्य को अनाहत और अक्षुण्ण बनाये रखने की रहा । यह वह धारा है, जिसने कविता को स्वायत्त अनुशासन का रूप दिया है और उसे एक परिपूर्ण व्यवस्था के रूप में परिणत कर दिया है । इन कवियों की अन्तदृष्टि वस्तुत: वैश्विक है । यह इनकी अविस्मरणीय उपलब्धि है । सौन्दर्यबोध छायावाद का सर्वाधिक मौलिक प्रदेय है । भारतीय साहित्य साधना में आचार्य शंकर, महाकवि कालिदास और गुरुदेव रवीन्द्रनाथ के पश्चात् सौन्दर्य की अनाविल सृष्टि यदि कहीं एकत्र दिखायी देती है तो छाया- वादी कवियों में । इन कवियों ने भक्तिकाव्य तथा द्विवेदी युग के परहेजी संस्कार, रीतिकालीन कवियों के कायिक कौतुकी कदाचार और प्रगतिवादियों, प्रयोगवादियों एवं साठोत्तरी पीढ़ियों के यौनाकुल आवेश ज्वार से ऊपर उठकर सौन्दर्य की श्रेष्ठ साधना की है । इनका सौन्दर्य विधान इतना व्यापक है, इनका चित्राधार इतना विराट है और इनकी सृष्टि-दृष्टि इतनी विलक्षण है कि उसमें प्राय: जीवन का सर्वस्व समाहित हो गया है । हिन्दी सौन्दर्यशास्त्र सम्प्रति अपनी स्वायत्तता की खोज में है । भारतीय संस्कृति, भाषिक प्रकृति और हिन्दी जाति की संश्लिष्ट संवेदना ही अपनी अस्मिता है । इसे सहेजने के लिए व्यावहारिक सौन्दर्यशास्त्र ही सक्षम हो सकता है । इस अध्ययन द्वारा छायावादी कवियों की शब्द रूढ़ियों के माध्यम से उनके उपचेतन में विद्यमान अर्थच्छवियों और बिम्बों को रूपायित किया गया है । यह समाज मनोभाषिकी, शब्द सांख्यिकी, संरचनात्मक समीक्षा और संवेदनशास्त्र का एक समन्वित-समेकित प्रयास है । वस्तुत: व्यावहारिक समीक्षा के समानान्तर यह एक अभिनव उपागम है और सौन्दर्यशास्त्रीय अध्ययन परंपरा में एक नया प्रस्थान भी ।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Suryaprasad Dixit

    डॉ ० सूर्यप्रसाद दीक्षित

    जन्म : ६ जुलाई, १९३८, बन्नावाँ, रायबरेली (उत्तरप्रदेश)

    प्रोफेसर तथा पूर्व अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय,संस्थापक अध्यक्ष : पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय। दो शोध-प्रबन्ध प्रकाशित ‘छायावादी गद्य’ (पीएच.डी) व ‘व्यावहारिक सौन्दर्यशास्त्र’ (डी.लिट्.)। इनके अतिरिक्त लगभग ५० शोधपरक पुस्तकों के रचयिता।

    सम्मान : ‘उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान’ से ‘साहित्य भूषण’ सम्मान, १९९८, ‘दीनदयाल उपाध्याय’ सम्मान, २००२, हिन्दी साहित्य सम्मेलन से ‘साहित्य  वाचस्पति’ उपाधि, १९९९, इण्टरनेशनल सेण्टर, वैâम्ब्रिज से ‘इण्टरनेशनल मैन आफ दी इयर’, १९९८, ‘अमेरिकन इन्स्टीट्यूट’ से ‘डिसिंटग्विश्ड परसनालिटी आफ दी वर्ड’, १९९८, साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा ‘आथर इन रेजीडेन्स’ फेलोशिप, २०१२।

    सम्बन्धित संस्थाएँ : ‘भारतीय हिन्दी परिषद्’, प्रयाग, ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’, प्रयाग, ‘पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी आफ इण्डिया’, लखनऊ, ‘उ.प्र. हिन्दी संस्थान, ‘बिरला फाउण्डेशन’ आदि।

    सम्पर्क : ‘साहित्यिकी’  

    डी-५४,निरालानगर, लखनऊ-२२६०२०

    फोन : ०५२२-२७८८४५२,

    मो. : ९४५११२३५२५

    ईमेल : spdixit65@rediffmail.com

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144