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Prithvi

Prithvi

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  • Pages: 247
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789386863904
  •  
    पृथ्वी जैसी हमें दिखती है वैसी अतीत मे नहीं थी और न ही भविष्य में रहेगी । धरती पर तरल जल का होना ही इसे ब्रह्माण्ड में विशिष्ट बना देता है । सौरमण्डल में किसी भी ग्रह अथवा उनके उपग्रहों के धरातल पर तरल जल उपलब्ध नहीं है । तरल जल का सीधा सम्बन्ध जीवन से है । पृथ्वी की वे परिस्थितियाँ जिन्होंने महासागरों तथा वायुमण्डल का निर्माण होने दिया और उन्हें कायम रखा, अन्य ग्रहों पर नहीं है । परन्तु ब्रह्माण्ड बहुत विशाल है, और असंख्य ग्रह दूसरे सितारों के चारों ओर उसी तरह परिक्रमारत है जैसे हमारे सौरमण्डल के ग्रह अतएव उनमें से कुछ ग्रहों पर तरल जल के महासागरों एवं पृथ्वी जैसी परिस्थितियों के होने की सम्भावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता । और यदि ऐसा है तो वहॉ जीवन भी होगा । कैसा होगा धरती का भविष्य ? टेक्टानिक गतिविधियों से अनुप्रेरित महाद्वीपीय संरचना अगले 25 से 35 करोड़ वर्षों में एक बृहत् अखण्डित महाद्वीप का रूप ले सकती है जैसा कि अतीत में एक से अधिक बार हो चुका है । अगले चार अरब वर्षों में सूर्य की चमक क्रमबद्ध ढंग से बढेगी जिसका अर्थ है कि पृथ्वी को अधिक ऊर्जा मिलेगी जिसके कारण सिलिकेट खनिजों का कालाधारित क्षरण अधिक होगा जिससे धरती का कार्बन-सिलिकेट-चक्र प्रतिकूलता: प्रभावित होने लगेगा जिसके फलस्वरूप वायुमण्डल में कार्बन-डाईऑक्साइड गैस का स्तर गिरेगा। धीरे-धीरे वनस्पतियों का लोप होता जायेगा और वानस्पतिक खाद्य श्रृंखला टूट जायेगी जिससे उन पर आधारित समस्त प्राणि जगत् के अस्तित्व पर ही संकट आ जायेगा ।

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    Chandramani Singh

    चन्द्रमणि सिंह का जन्म 4 जून,1349 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के कैंथी ग्राम में हुआ । इन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से भौतिक रसायन में परास्नातक उपाधि प्राप्त की । इसके पश्चात् उत्तर प्रदेश सहकारी सेवा में राजपत्रित पद पर नियुक्त हुए । विभिन्न पदों पर कार्यरत रहते हुए 36 वर्षों की सेवा के उपरान्त वर्ष

    2011 में लोकसेवा आयोग उत्तर प्रदेश के सदस्य पद से सेवा निवृत हुए । सम्प्रति स्वाध्याय एवं लेखन में निमग्न ।

    प्रकाशित पुस्तकें : वेद, विज्ञान एवं ब्रह्माण्ड (2012); अद्भुत ब्रह्माण्ड (2015 ); असीम सृष्टि (2017 ) ।

    वेद, विज्ञान एवं ब्रह्माण्ड पुस्तक पर विज्ञान परिषद प्रयाग द्वारा विज्ञान रत्न श्री लक्ष्मण प्रसाद अविष्कार लेखन सम्मान’, उत्तर प्रदेश हिंन्दी संस्थान,  लखनऊ द्वारा 'के.एन. भाल नामित पुरूस्कार' एवं दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा 'संस्कृत सेवा सम्मान’ से सम्मानित किए जा चुके है । अदभुत ब्रह्माण्ड पुस्तक पर उ.प्र. हिन्दी संस्थापन, लखनऊ द्वारा वर्ष 2015 के लिए आर्यभट्ट आशीष सर्जना पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।

    सम्पर्क : 3/377, विशाल खण्ड-3, गोमती नगर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश ।

    ईं-मेल : cmsinghkaithi@gmail.com

    मो. : 91-9415101924

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