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Chakradhar Ki Sahityadhara

Chakradhar Ki Sahityadhara

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  • Pages: 176p
  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180317026
  •  
    मार्कण्डेय आजादी के बाद हिन्दी साहित्य के इतिहास में सम्भवत: पहले टिप्पणीकार थे । इस बात का पता तब चला जब कल्पना' पत्रिका में साहित्यधारा स्तम्भ लिखनेवाले चर्चित चक्रधर का राज खुला । यानी चक्रधर कोई और नहीं मार्कण्डेय ही थे । प्रस्तुत पुस्तक से मार्कण्डेय के आलोचक- व्यक्तित्व का पहलू पाठकों के सामने खुलेगा । साहित्य-जगत् में इस पुस्तक का अपना एक ऐतिहासिक महत्त्व भी होगा । इन टिप्पणियों का समय 1950 से 60 ई. के बीच का है जो आजादी के तुरन्त बाद पड़ता है। आजादी की इस घटना का जीवन के हर पहलू पर व्यापक असर पड़ा, साहित्य भी इससे अछूता नहीं था । इस पूरे बदलते हुए समय, समाज, संस्कृति और साहित्य को मार्कण्डेय ने अपने नजरिये से देखा-समझा और बेबाक टिप्पणियाँ लिखीं जो आपके समक्ष प्रस्तुत हैं । सम्पादक द्वय

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    Markandey

    2 मई, 1930 में बराई गाँव-जिला जौनपुर में जन्में मार्कण्डेय की प्राथमिक शिक्षा गॉव में, आगे  की पढाई प्रतापगढ़ से उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्जित किया ।

    मार्कण्डेय स्वाधीन भारत के कथाकार थे, लेकिन वे गहरे अर्थों में भारतीय सामाजिक चेतना के भी कथाकार रहे है । उन्होंने अपनी कहानी का आरम्भ वहीं से किया जहॉ प्रेमचन्द ने कहानी को छोडा था। प्रेमचन्द की ही तरह मार्कण्डेय भी मूलत: देशज संवेदना के कथाकार थे । प्रेमचन्द की परम्परा से मार्कण्डेय का रिश्ता महज ग्रामीण यथार्थ का ही न होकर उस समूचे सामा-जिल ताने- बाने का भी था जिसके बिना न तो किसी

    पारम्परिक समाज को समझा जा सकता है और न उसके आगत क्री आहटें सुनी जा सकती है । मार्कण्डेय देश के राजनीतिक जनतंत्र का उत्सवीकरण करने के बजाय अपनी कहानियों में उसका सामाजिक और

    आर्थिक क्रिटीक रचते है ।

    कहानियों के अलावा तो उपन्यास 'सेमल के फूल' तथा ‘अग्निबीज’ एकांकी-संग्रह "पत्थर व परछाइयाँ, काव्य-संभ्रह 'सपने तुम्हारे थे' तथा ‘यह पृथ्वी तुम्हें देता हूँ’,  आलोचना ‘कहानी की बात’, ‘नयी कहानी : यथार्थवादी नजरिया, प्रगतिशील साहित्य की जिम्मेदारी, साहित्य संवाद कल्पना में चक्रधर नाम से लिखा गया स्तम्भ ‘चक्रधर की साहित्यकार' नाम से प्रकाशित ।

    निधन : 18 मार्च, 2010 ।

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