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Chitralekha Ka Mahatva

Chitralekha Ka Mahatva

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  • Pages: 200p
  • Year: 2014
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180319310
  •  
    अपने प्रकाशन के लगभग तत्काल बाद से ही 'चित्रलेखा' किसी-न-किसी रूप में चर्चा और विवादों में रही है । लेकिन उसका खुमार आज भी बना है । जैसा कि प्राय: कोई नयी जमीन तोड़नेवाली हर रचना के साथ होता है, वह अपने साथ अनेक प्रश्नों और विवादों को भी लेकर आती है । 'चित्रलेखा' के साथ भी यह सच है । एक ओर यदि वैचारिक धरातल पर भगवतीचरण वर्मा और उनकी रचना का विरोध हुआ, वहीं कभी उनके स्त्री पात्रों, कभी बीजगुप्त के प्रेम-दर्शन और जीवन-पद्धति को आधार बनाकर लेखक पर अनेक सवाल उठाये गये । किसी भी रचना पर विचार और मूल्यांकन की प्रक्रिया में पहला काम उस रचना को वस्तुपरकता के साथ देखना और समझना है । 'चित्रलेखा' को सम्पूर्णता में समझने के लिए यहाँ बहुत से ऐसे पक्षों पर लिखवाया गया है जिसके बिना उसका कोई भी मूल्यांकन अधूरा होगा । यहाँ जो सामग्री संकलित है उसके माध्यम से 'चित्रलेखा' को समूचे परिप्रेक्ष्य में अधिक पूर्णता से समझा जा सकेगा ।

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    Madhuresh

    मधुरेश
    जन्म : 10 जनवरी, 1939 को बरेली में एक निम्न-मध्यवित्त परिवार में हुआ। उनकी सारी पढ़ाई वहीं हुई। बरेली कॉलेज, बरेली से अंग्रेजी और हिन्दी में एम.ए.। कुछ वर्ष अंग्रेजी पढ़ाने के बाद लगभग तीस वर्ष शिवनारायण दास पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, बदायूँ के हिन्दी विभाग में अध्यापन। 30 जून, 1999 को सेवानिवृत्त होकर पूरी तरह साहित्य में सक्रिय।
    प्रकाशित कृतियाँ : आज की हिन्दी कहानी : विचार और प्रतिक्रिया, यशपाल के पत्र, सिससिला : समकालीन कहानी की पहचान, क्रान्तिकारी यशपाल : एक समर्पित व्यक्ति (सं.), देवकीनन्दन खत्री (साहित्य अकादमी के लिए), सम्प्रति : समकालीन हिन्दी उपन्यास में संवेदना और सरोकार, रांगेय राघव (साहित्य अकादमी के लिए), राहुल का कथा-कर्म, हिन्दी कहानी का विकास, हिन्दी कहानी : अस्मिता की तलाश, हिन्दी उपन्यास का विकास, नई कहानी : पुनर्विचार, यह जो आईना है (संस्मरण), 'परिवेश' के आलोचक प्रकाश चन्द्र गुप्त पर केन्द्रित अंक के अतिथि सम्पादक, अमृतलाल नागर : व्यक्तित्व और रचना संसार, भैरव प्रसाद गुप्त (साहित्य अकादमी के लिए), मैला आँचल का महत्त्व (सं.), दिव्या का महत्त्व, और भी कुछ, हिन्दी उपन्यास : सार्थ की पहचान, यशपाल के पत्र, कहानीकार जैनेन्द्र कुमार : पुनर्विचार, हिन्दी आलोचना का विकास, मेरे अपने रामविलास, भारतीय लेखक : यशपाल पर केन्द्रित विशेषांक के अतिथि सम्पादक, यशपाल रचना संचयन (सं.) (साहित्य अकादमी के लिए), यशपाल : रचनात्मक पुनर्वास की एक कोशिश, बाणभट्ट की आत्मकथा : पाठ और पुर्नपाठ (सं), यशपाल रचनावली की भूमिकाएँ, माक्र्सवादी आलोचना और फणीश्वर नाथ रेणु (सं.), जुझार तेजा : लज्जाराम मेहता (सं.) रजिया सुल्ताना बेगम उर्फ  रंग महल में हालाहल : किशोरी लाल गोस्वामी (सं.), अश्क के पत्र, सौन्दर्योपासक ब्रजनन्दन सहाय (सं.)।
    सम्मान : समय माजरा सम्मान, राजस्थान (2004), गोकुल चन्द्र शुक्ल, आलोचना पुरस्कार, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल शोध संस्थान, वाराणसी (2004), राज्यपाल/कुलाधिपति द्वारा महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय की कार्य परिषद् में नामित (2009)।
    सम्पर्क : 372, छोटी बमनपुरी, बरेली-243003
    फोन : (0581) 2554670   मोबा. 9319838309

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