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Kabeer Granthavali (Sateek)

Kabeer Granthavali (Sateek)

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Special Price Rs. 225

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  • Pages: 688p
  • Year: 2013
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180317798
  •  
    कबीर निर्गुण संत काव्यधारा के ऐसे शब्द-साधक हैं जिन्होंने अपने युग की धार्मिक, सामाजिक एवं राजनितिक व्यवस्था से टकराकर अदभुत शक्ति प्राप्त की! पारम्परिक सांस्कृतिक प्रवाह में सम्मिलित प्रदूषित तत्वों को छानकर उसे मध्यकाल के लिए ही आस्वादनीय नहीं, बल्कि आधुनिक जनमानस के लिए भी उपयोगी बना दिया! भारतीय धर्म साधना में ऐसा निडर तथा अकुंठित व्यक्तित्व विरला है! पंडितो, मोल्वियो, योगियों आदि से लोहा लेकर कबीर ने जन साधारण के स्वनुभुतिजन्य विचारो और भावो की मूल्यवत्ता स्थापित की! कबीर की वाणी संत-कंठ से निसृत होकर साधको, अनुयायियों एवं लोक जीवन में स्थान एवं रूचि भेद के अनुसार विविध रूपों में परिणत हो गयी! इसलिए कबीर की वाणी के प्रमाणिक path निर्धारण की जटिल समस्या कड़ी हो गयी! कबीर पंथ में बीजक की श्रेष्ठ मान्य है, विद्वानों ने ग्रंथावलियो को महत्त्व दिया हा! सामान्य जन के लिए लोक में व्याप्त कबीर वाणी ग्राह्य है! अतः तीनो परम्पराओ में से किसी को भी व्यगना उचित नहीं है! फलतः कबीर की रचनाओ का समग्र रूप तीनो के समाहार से ही संबव है! प्रस्तुतु ग्रंथावली का संपादन इसी दृष्टि से किया गया है! मूल पाठ के साथ कबीर की मूल साधना तथा मंतव्य के अनुकूल भाष्य प्रस्तुत किया गया है! इसमें अपनी इच्छित दिशा में आवश्यकता से अधिक खींचकर पाठकीय सोच को कुंठित करने की चेष्ठ नहीं की गयी हा! कबीर-वाणी के प्रमाणिक एवं समग्र path की दृष्टि से तथा उसमे निहित विचारो, भावो एवं अनुभूतियो को उदघाटित करने की दृष्टि से यह कृति निश्चित ही उपादेय सिद्ध होगी!

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    Ramkishor Sharma

    प्रो. रामकोशोर शर्मा

    जन्म : 9-10-1949 को भैरोपुर, सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश में)

    शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से, डी.फिल की उपाधि।

    गतिविधियाँ : 1979 से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में कार्यरत, प्रवक्ता, उपाचाय (रीडर) आचार्य एवं अध्यक्ष पद का दायित्व सम्हालते हुए सम्प्रति सेवानिवृत, स्वतंत्र लेखन । अनेक शोध छात्रो एवं छात्राओं को डी.फिल उपाधि के लिए कुशल निर्देशन ।

    साहित्य-सेवा : निम्नलिखित पुस्तके प्रकाशित:

    अपभ्रंश मुक्तक काव्य और उसका हिन्दी पर प्रभाव, हिन्दी साहित्य का इतिहास, हिन्दी भाषा का विकास, आधुनिक भाषा विज्ञान के सिद्धान्त, भाषा विज्ञान, हिन्दी भाषा और लिपि, आधुनिक कवि, प्रेमचन्द की कहानियाँ : संवेदना और शिल्प, प्रयोजनमूलक हिन्दी, भाषा चिन्तन के नये आयाम, कबीरवाणी : कथ्य और शिल्प,

    गौरी (उपन्यास), हिन्दी साहित्य का समग्र इतिहास ।

    सम्पादन : सम्मेलन पत्रिका (यू.जी.सी. मान्य शोध पत्रिका)

    पद-प्रतिष्ठा : पूर्व प्रबन्ध मती, उपसभापति, भारतीय हिन्दी परिषद, इलाहाबाद, उपाध्यक्ष, साहित्यकार संसद, इलाहाबाद, साहित्य मंत्री-हिन्दी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद ।

    सम्मान : अक्षयवट, हिन्दुस्तानी अकादमी, नागरी प्रचारिणी सभा आदि संस्थाओं द्वारा सम्मानित । भारत के अनेक विश्वविद्यालयों, लोक सेवा आयोगों में शैक्षणिक एवं मूल्यांकन सम्बन्धी, कार्यों में सहयोग | लगभग 50 राष्ट्रीय, अन्तर्राट्रीय संगोष्ठियों में भागीदारी। अनेक पुरस्कार समितियों के निर्णायक मंडल के सदस्य ।

    सम्पर्क : 408-ए/15-जी, बक्शीखुर्द, प्रयागराज

    पिनकोड-211006 (उ.प्र.)

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