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Pragatisheel Chintak Siyaramsharan Gupt : Sampoorna Kavya : Vols. 1-2

Pragatisheel Chintak Siyaramsharan Gupt : Sampoorna Kavya : Vols. 1-2

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Special Price Rs. 1,800

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  • Pages: 1130p
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352211777
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    Siyaramsharan Gupt

    श्री सियारामशरण गुप्त
    राष्ट्रकवि श्री मैथिलीशरण गुप्त के अनुज श्री सियारामशरण गुप्त का जन्म 14 सितम्बर, 1895 ई. को गृहग्राम, चिरगाँव, झांसी, उत्तर प्रदेश में हुआ । कवि, कथाकार और निबन्ध लेखक के रूप में उन्होंने अपना विशिष्ट स्थान बना लिया था ।
    श्री सियारामशरण गुप्त की रचनाओं में उनके व्यक्तित्व की सरलता, विनयशीलता, सात्विकता और करुणा सर्वत्र प्रतिफलित हुई है । वास्तव में गुप्त जी मानवीय संस्कृति के साहित्यकार हैं । उनकी रचनाएं सर्वत्र एक प्रकार के चिन्तन, आस्था-विश्वासों से भरी हैं, जो उनकी अपनी साधना और गांधी जी के साध्य साधन की पवित्रता की गूंज से ओत-प्रोत हैं ।

    आपकी साहित्य सेवा चिरस्मरणीय रहेगी । आप द्वारा रचित काव्य में मौर्य-विजय, अनाथ, दूर्वाद्रल, विषाद, आर्द्रा, आत्मोत्सर्ग, पाथेय, मृणमयी, बापू, उन्मुक्त, दैनिकी, नकुल, नोआखली में, जयहिन्द, गीता-संवाद, गोपिका, अमृत-पुत्र । उपन्यास-गोद, अंतिम आकांक्षा, नारी । कहानी-संग्रह में मानुषी । निबन्ध-संग्रह झूठ-सच तथा नाटक पुण्य पर्व लोकप्रिय हैं ।
    देहावसान - 29 मार्च, 1963

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