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Dinkar Rachanawali : Vols. 1-14

Dinkar Rachanawali : Vols. 1-14

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Special Price Rs. 8,820

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  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180315909
  •  
    दिनकर जी की स्‍वराज्‍योत्‍तर कृतियों में गद्य की महिमा प्रखरता से निखरी है । स्वराज्य के बाद दिनकर जी के अनेक गद्य-ग्रन्थ प्रकाशित हुए हैं । इनमें 'उजली आग' को किस कोटि में रखना ठीक है इसका निर्णय हिन्दी के आलोचक अब तक नहीं कर पाए हैं । वास्तव में इस छोटी-सी पुस्तक में प्रधानता बोध-कथाओं की है । इन कथाओं के कथानक कभी तो यूरोप में प्रचलित पुराणों से लिये गए हैं तो कभी चीन के दर्शनाचार्यों से किन्तु, कितने ही कथानक बिलकुल मौलिक हैं । इसके अतिरिक्त इस ग्रन्थ में कुछ विचारोत्तेजक काव्यंगन्धी निबन्ध भी हैं । सबसे विलक्षण निबन्ध 'नूतन काव्य-शास्त्र' है जिसकी शैली गद्यकाव्य की है किन्तु चिन्तन काव्यशास्त्रीय है । -डी. लक्ष्मीनारायण सुधांशु

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    Ramdhari Singh Dinkar

    रामधारी सिंह ‘दिनकर’

    राष्ट्रकवि 'दिनकर' छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओं में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति। वे संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू के भी बड़े जानकार थे। वे 'पद्म विभूषण' की उपाधि सहित 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार', 'भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार' आदि से सम्मानित किए गए थे।

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