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Ekda Naimisharanye

Ekda Naimisharanye

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  • Pages: 340
  • Year: 2015
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352210404
  •  
    यह साहित्य कथा उस भावनात्मक आन्दोलन से जुडी है जिसने पहली बार भारत की सभी जातियों के उत्तम विचार और संकर लेकर तथा ब्राहमण और श्रवण धर्म का उचित समन्वय करके समूचे भारत को एकता प्रदान की जिसके सही और गलत प्रभावों से यह देश आज तक बंधा हुआ है ! पुरानी दुनिया में भारत के महत्तपूर्ण स्थान और विश्वव्यापी मानव संस्कृति की रसभीनी छटा लहराने वाला, भारतीय साहित्य में अपने रंग का अकेला यह उपन्यास आपके हाथों में है ! उपन्यास का पहला पृष्ठ पढना आरम्भ कीजिये और फिर अन्तिम पृष्ठ पूरा पढ़े बिना आप इसे छोड़ नहीं सकेंगे ! कुपोशंनो और यूनानियों की दासता से ट्रस्ट और विखंडित भारत के पुनःसंगठित होकर एक सशक्त और समृद्ध देश बनने की यह प्रेरणादायक, रंगारंग भारतीय छवियों से भरपूर, यह रोचक राष्ट्रकथा पढ़कर आप को आज के भारत की समस्याओं पर गहराई से विचार करने की स्फूर्ति मिलेगी !

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    Amritlal Nagar

    नागरजी का जन्म 17 अगस्त, 1916 को आगरा में हुआ। लखनऊ में शिक्षा प्राप्त की और फिर वहीं बस गये। तस्लीम लखनवी, मेघराज, इंद्र आदि उपनामों से भी लेखन किया है। बंगला, तमिल, गुजराती और मराठी भाषाओं के ज्ञाता। उनकी रचनाओं में ‘वाटिका’, ‘अवशेष’, ‘नवाबी मसनद’, ‘तुलाराम शास्त्री’, ‘एटम बम’, ‘एक दिल हजार दास्ताँ’, ‘पीपल की परी’, नामक कहानी-संग्रह; ‘महाकाल’, ‘सेठ बाँकेमल’, ‘बूँद और समुद्र’, ‘शतरंज के मोहरे’, ‘अमृत और विष’ आदि उपन्यास, ‘गदर के फूल’, ‘ये कोठेवालियाँ’ आदि शोधकृतियाँ तथा बाल-साहित्य की ‘नटखट चाची’, ‘निंदिया आजा’ आदि उल्लेखनीय हैं। अन्य महत्त्वपूर्ण कृतियों में तुलसी के जीवन पर आधारित महाकाव्यात्मक उपन्यास ‘मानस का हंस’; हास्य-व्यंग्य संग्रह ‘कृपया दाएँ चलिये’, ‘भरत पुत्र नौरंगीलाल’ तथा संस्मरण-संग्रह ‘जिनके साथ जिया’ प्रमुख हैं।

    नागरजी साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हुए और उनकी अनेक कृतियाँ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भी पुरस्कृत हुई हैं।

    निधन: 23 फरवरी, 1990

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