• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Asha Kalindi Aur Rambha

Asha Kalindi Aur Rambha

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 700

Special Price Rs. 630

10%

  • Pages: 487p
  • Year: 2014
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180318658
  •  
    आशा-कालिंदी और रम्भा नामक उपन्यासों की त्रयी क्रमशः सामंतवादी, पूंजीवादी और गांधीवादी व्यवस्था में स्त्री की स्थिति पर एक टिप्पणी है ! आशा उपन्यास की नायिका स्वयं अपनी कहानी सुनाती है ! सेठ कालिंदी प्रसाद आशा अर्थात जानकी बाई को अपनी रखैल बनाना चाहता है ! निर्धन दुकानदार बाप की बेटी होने के कारण ही नवाब के हरम में पहुंचा दी जाती है और बाद में वहां से मुक्त होने पर जानकी बाई के रूप में नाचने-गाने का धंधा करने लगती है ! आशा नवाब और सेठ कालिंदी प्रसाद दोनों के लिए ही स्त्री भोग की सामग्री है ! अगली कड़ी में सेठ कालिंदी अपनी कहानी कहता है ! उसका सबसे बड़ा कष्ट यह है कि रूपये के लालच में उसका पिता उसका विवाह बड़े घर की फूहड लड़की से कर देता है ! पैसा उसके पास कितना ही हो, श्वसुर की सहायता से दूसरे विश्वयुद्ध में वह और भी कमाई करता है ! लेकिन उसका पारिवारिक जीवन नरक बना हुआ है ! अंग्रेजों और कांग्रेस दोनों के बीच संतुलन साधकर वह व्यापर में खूब उन्नति करता है ! असफल दांपत्य जीवन के कारण वह एक वेश्या से सम्बन्ध बनाता है और उसी से उत्पन्न बेटी का नाम वह रम्भा रखता है ! रम्भा, इसकी नियति भी बहुत भिन्न नहीं है ! अलग कोठी में पाली-पोसी जाने के बावजूद उसे सोलह साल की उम्र में चालीस साल के सेठ सोनेलाल की रखैल बनने को बाध्य होना पड़ता है, क्योंकि उसके पिता सेठ कालिंदी चरण मेंयाह साहस नहीं है कि समाज में यह कह सके कि वह उसकी बेटी है ! सेठ सोनेलाल की रखैल बन जाने के बाद भी रम्भा अपने विकास के लिए संघर्ष करती है ! पढ़कर एम्.ए. करने के दौरान आनंद के संपर्क में आती है ! सोनेलाल का गर्भ धारण करके भी वह उससे घृणा करती है ! आनंद के संपर्क में आकर वह जनसेवा की ओर प्रवृत होती है और एक स्कूल चलाने लगती है !

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Bhairavprasad Gupt

    भैरवप्रसाद गुप्त

    जन्म : 7 जुलाई 1918 को सिवानकला गाँव (बलिया, उ॰प्र.) ।

    शिक्षा : इविंग कॉलेज, इलाहाबाद से स्नातक ।

    अपने शिक्षक की प्रेरणा से कहानी लेखन की ओर रुझान हुआ । जगदीशचन्द्र माथुर, शिवदान सिंह

    चौहान जैसे लेखकों एवं आलोचकों के सम्पर्क और साहित्यक-राजनीतिक परिवेश में उनके रचनात्मक संस्कारों को दिशा मिली ।

    सन् 1940 में मजदूर नेताओँ से सम्पर्क । सन् 1944 में माया प्रेस, इलाहाबाद है जुडे । अपने अन्य समकालीनों की तरह आर्य समाज और गाँधीवादी राजनीति की राह से बामपंथी राजनीति की ओर आये । सन 1948 में वे कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बने ।

    प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें : उपन्यास-शोले, मशाल, गंगा मैया, जंजीरें और नया आदमी, सत्ती मैया का चौरा, धरती, आशा, कालिन्दी, रम्भा, अंतिम अध्याय, नौजवान, एक जीनियस की प्रेमकथा, भाग्य देवता, अक्षरों के आगे (मास्टर जी) , 'छोटी-सी शुरुआत , कहानी संग्रह-मुहब्बत्त की राहें, फरिश्ता, बिगडे हुए दिमाग, इंसान, सितार के तार, बलिदान की कहानियाँ, मंजिल, महफिल, सपने का अंत, आँखों का

    सवाल, मंगली की टिकुली, आप क्या कर रहे हैं ? नाटक और एकांकी-कसौटी, चंदबरदाई, राजा का बाण । सम्पादित पत्रिकाएँ-माया, मनोहर कहानियाँ, कहानी, उपन्यास, नई कहानियाँ, समारंभ-1, प्रारंभ ।

    निधन: 5 अप्रैल, 3995

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144