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Jo Bhula Diye Gaye

Jo Bhula Diye Gaye

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  • Pages: 580p
  • Year: 2013, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180317873
  •  
    चौरी चौरा काण्ड को काँग्रेसियों ने इतिहास के बाहर कर दिया कि उसके कारण गाँधी जी ने अपना आन्दोलन वापस ले लिया था। क्रान्तिकारियों ने उसे बाहर कर दिया क्योंकि उसमें किसी नामी-गिरामी क्रान्तिकारी हिस्सा नहीं लिया था। अँग्रेजों ने बाहर कर दिया क्योंकि वह उनकी सत्ता को सीधे ललकार गया। दु:खद यह कि उसे जन ने भी बाहर कर दिया, जबकि वह सबाल्टर्न की दृष्टि से हुआ आजादी की लड़ाई में एक महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षेप था। फिर उसकी स्मृति कुछ लोगों के मन में हमेशा गूँजती रही है और नई पीढ़ी के लोग उससे जुड़े लोगों के बारे इधर काफी जिज्ञासु दिखते हैं। इस उपन्यास में उनकी कथा के साथ-साथ गोरखपुर के इलाके में प्रांत और राष्ट्र से जुड़कर यह आजादी की लड़ाई १९२० से लेकर १९४२ तक वैâसे चली थी उसकी एक झलक यहाँ मिलेगी, वहाँ मिलेगी, वहाँ के सामाजिक जीवन की तमाम छवियों के साथ। उत्तर-पूर्व को लेकर लिखनेवाले श्रीप्रकाश मिश्र के लेखन में यह उपन्यास एक नया मोड़ इंगित करता है, जो पाठकों को कई तरह से पसंद आयेगा।

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    Shriprakash Mishra

    श्रीप्रकाश मिश्र
    श्रीप्रकाश मिश्रके अब तक पाँच कविता संग्रह : मौन पर शब्द (1986), शब्द के बारीक तारों से (2009), शब्द संभावनाएँ है (2012), मिअमाड़ (2015), कि जैसे होना खतरनाक संकेत (2017), चार उपन्यास : जहाँ बांस फूलते हैं (1996), रूपतिल्ली की कथा (2006), जो भुला दिये गये (2013), आपरेशन खुदाबख्श (2015), चार आलोचना की पुस्तकें : यह जो आ रहा है हरा (1992), यूरोप के आधुनिक कवि (2011), चुग की नब्ज (2012), रचना का सच (2013) के अलावा चिन्तन की दो पुस्तकें : सोच की दृग छाया (2017) और उत्तर आधुनिक अवधारणाएं (2018) प्रकाशित है । ग्राम जड़हा जिला कुशीनगर (उ.प्र.) के निवासी श्रीप्रकाश मिश्र एम.ए. ( राजनीति शास्त्र) और एल-एल.एम हैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय से । विद्यार्थी जीवन में छात्र राजनीति में सक्रिय रहे । बांग्ला देश की आजादी की लडाई में मुक्तिवाहिनी के साथ रहे । केन्द्र सरकार की सेवा में रहते हुए उत्तर-पूर्व, कश्मीर, भूटान, बांग्ला देश आदि में रहे । अब इलाहाबाद में रहते हैं और कविता की अनियतकालीन पत्रिका ‘उन्नयन' का संपादन/प्रकाशन करते है । रामविलास शर्मा सम्मान के संस्थापक व पुरस्कर्ता है ।

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