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Manimala

Manimala

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  • Pages: 314p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180311734
  •  
    पं. इलाचन्द्र जोशी की रचनात्मक प्रतिभा से परिचित लोग यह भली भाँति जानते हैं कि पाठ- सम्मोहन को वे उपन्यास का सर्वश्रेष्ठ गुण मानते हैं। सिर्फ मनोरंजन ही नहीं वरन् उत्सुकता, चमत्कार और कहानी कहने की मनोरंजक प्रक्रिया पर वे विशेष ध्यान देते हैं। ‘मणिमाला’ नामक इस उपन्यास में उनकी रचना- प्रकृति के सारे गुण एक साथ विद्यमान हैं। अपने आस-पास के जीवन से बिलकुल अलग, दूर मसूरी के एक होटल में वे एक दूसरे आदमी द्वारा सुनी हुई कहानी को लिपिबद्ध करके पाठक की उत्सुकता को जाग्रत करते हैं और एक जिप्सी लड़की को उपन्यास का मुख्य पात्र बनाकर उपन्यास को एक ऐसा आयाम देते हैं कि पाठक साँस बाँधकर ‘आगे क्या हुआ’ सोचता हुआ उपन्यास समाप्त कर देता है। हिन्दी उपन्यास को लोकप्रिय बनाने में जिन उपन्यासकारों की भूमिका है, उसमें जोशीजी का नाम सर्वोपरि है और उनके अनेक महत्त्वपूर्ण उपन्यासों में ‘मणिमाला’ उनकी रचनाशीलना के समस्त गुणों का आईना है।

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    Ilachandra Joshi

    इलाचंद्र जोश

    जन्म : 13 दिसम्बर, 1902 ई. अल्मोड़ा में एक प्रतिष्ठित मध्यवर्गीय परिवार में हुआ । अल्मोड़ा जैसे

    प्राकृतिक रमणीय स्थान ने इनके व्यक्तित्व पर असर डाला है ।

    गतिविधियाँ : सन् 1921 में शरद बाबू से इनकी भेंट । 'चाँद' के सहयोगी सम्पादक, सन् 1929 में

    ‘सुधा’ का सम्पादन । पहला उपन्यास जो 1927 ई. में लिखा गया था, सन् 1929 में प्रकाशित हुआ ।

    'कोलकाता समाचार’, 'चाँद', ‘विश्वचाणी', ‘सुधा’, ‘सम्मेलन-पत्रिका', 'संगम', 'धर्मयुद्ध'

    और 'साहित्यकार' जैसी पत्रिकाओं के सम्पादन से भी जुडे रहे ।

    प्रमुख रचनाएँ

    उपन्यास : लज्जा, संन्यासी, पर्दे की रानी, प्रेत और छाया, निर्वासित, मुक्तिपथ, सुबह के भूले,

    जिप्सी, जहाज का पंछी, भूत का भविष्य, ऋतुचक्र ।

    कहानी : धूपरेखा, दीवाली और होली, रोमांटिक छाया, आहुति, खँडहर की आत्माएँ, डायरी के नीरस पृष्ठ, कटीले फूल लजीले काँटे ।

    समालोचना तथा निबन्ध : साहित्य सर्जना, विवेचना, विश्लेषण, साहित्य चिंतन, शरतचंद्र-व्यक्ति और कलाकार, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, देखा-परखा।

    पुरस्कार : उत्तर प्रदेश शासन द्वारा ‘ऋतुचक्र' उपन्यास पर प्रेमचन्द पुरस्कार 1969-70 ईं., राज्य साहित्यिक पुरस्कार उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 1974-75 ईं. विशिष्ट पुरस्कार उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 1976 -77, साहित्य वाचस्पति की उपाधि 1979 ईं. ।

    निधन : सन् 1982 ईं. ।

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