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Banarasibai

Banarasibai

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  • Pages: 160
  • Year: 2017, 2nd Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180316975
  •  
    .. .मुझे याद है कि इस मामले के इन्वेस्टिगेशन का भार मुझ पर ही पड़ा था । रिश्वतखोरी पकड़ने की नौकरी में कुछ ही साल था मैं । अनेकों तरह की अभिज्ञताएँ हुई थी उस नौकरी में । उनमें यह समर और कनक की भी घटना थी । कनक और समर आज भी कलकत्ते में एक फ्लैट में रहते हैं । प्राय: मिलना होता है । सुखी जीवन है उनका । मैंने बस उनका नाम-धाम बदल दिया है । नहीं तो सब सच है ।... और मिसेज दास? उनका पता नहीं चला । वह शायद किसी और शहर में जाकर अभी भी यही धन्धा चला रही हैं ।...

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    Bimal Mitra

    बंगला के सुपरिचित कथाकार।

    जन्म: 18 मार्च 1912 को कलकत्ता में।

    शिक्षा: कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.ए.।

    व्यवसाय: मुख्यतः लेखन।

    अब तक अनेक कहानियाँ और उपन्यास लिख चुके हैं। बंगलाभाषी समाज के अलावा हिंदी व तमिल समाज में भी समान रूप से लोकप्रिय हैं।

    उल्लेखनीय कृतियाँ:

    उपन्यास: अन्यरूप, साहब बीबी गुलाम, मैं राजाबदल, परस्त्री, इकाई दहाई सैकड़ा, खरीदी कौड़ियों के मोल, मुजरिम हाजिर, पति परम गुरु, बेगम मेरी विश्वास, चलो कलकत्ता आदि। कुल लगभग 70 उपन्यासों की रचना।

    कहानी-संगह: पुतुल दीदी, रानी साहिबा।

    रेखा-चित्र: कन्यापक्ष।

    निधन: 2 दिसम्बर, 1991

     

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