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Gyan-Darshan

Gyan-Darshan

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  • Pages: 319p
  • Year: 2000
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: GD112
  •  
    इस पुस्तक में शान संबंधी दर्शनिक समस्याओं का एक प्रारंभिक विवेचन प्रस्तुत किया गया है । ज्ञान, सत, और मूल्य दर्शन के प्रमुख विषय-क्षेत्र माने गये है और इसमें संदेह नहीं कि इनमें ज्ञान एक आधारभूत स्थान रखता है जिसके प्रश्नों के उत्तर सत् और मूल्य संबंधी प्रश्नों पर भी प्रकाश डालते हैं । दर्शन विभिन्न सूचनाओं का समूह न होकर सोचने या तर्क-वितर्क करने की प्रक्रिया है । इसीलिये इस पुस्तक में यह प्रयत्न किया गया है कि दार्शनिक प्रश्न और उनके हल के प्रयत्न उसी रूप में प्रस्तुत किये जाएँ, न कि विभित्र दार्शनिकों द्वारा प्रतिपादित अंतिम सिद्धांतों के रूप में । इस पुस्तक की रुचि दर्शन के इतिहास में न होकर उस विचार या तर्क में है जिसके द्वारा समस्याओं के समाधान की तलाश होती है और जो दर्शन का सार-तत्व है । अत: प्रस्तुत लेखन का यह उद्देश्य रहा है कि पाठकों को केवल विभिन्न दार्शनिक, विचारों का मात्र संग्रह करने की नहीं, बल्कि स्वतंत्र चिंतन की प्रेरणा मिले । स्पष्ट है कि ऐसे चिंतन एवं उसकी अभिव्यक्ति के लिये अपनी मातृभाषा ही सबसे उपयुक्त साधन है । क्योंकि विचारों की स्पष्ट समझ और सृजनशीलता का आदर्श प्राप्त करना उसी दशा में संभव है । आशा है कि प्रस्तुत ग्रंथ का इस दिशा में अच्छा योगदान होगा ।

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    Shyam Kishor Seth

    श्री श्याम किशोर सेठ
    जन्म-स्थान : मिर्जापुर । इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए, और एम.ए. की डिग्री प्राप्त करके सन्  1954 में यहीं पर दर्शन विभाग में प्रवक्ता नियुक्त हुए । 35 वर्ष से अधिक अध्यापन कार्य के पथार सन् 1990 में सेवानिवृत्त हुए । तर्कशास्‍त्र, ज्ञानमीमांसा, नीतिशास्र तथा धर्मदर्शन इनकी अभिरुचि के विशेष क्षेत्र रहे हैं । इनके निर्देशन में कई विद्यार्थी डी.फिल. की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं और कुछ अभी शोधकार्य में संलग्न हैं ।
    ' विभित्र दर्शनिक समस्याओं पर श्री सेठ ने अनेक लेख लिखे हैं जो हिंदी व अंग्रेजी की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए । आकाशवाणी से भी दर्शन संबंधी इनकी कुछ वार्ताएँ प्रसारित हुई । आपने डॉ. नीलिमा मिश्र के साथ 'ज्ञान-दर्शन 'Philosophy of Knowledge' डस' 'तर्कशास्‍त्र-एक आधुनिक परिचय एवं ईश्वर, स्वतंत्रता और अमरत्व : एक तत्वदार्शनिक अध्ययन' नामक तीन पुस्तकों का लेखन भी किया है ।
    श्री सेठ 'इंडियन फिलॉसॉफिकल काँग्रेस और  'अखिल भारतीय दर्शन परिषद' के आजीवन सदस्य हैं और वे 1999 में 'उत्तर भारत दर्शन परिषद' के गोरखपुर अधिवेशन के अध्यक्ष थे ।
    डॉ. नीलिमा मिश्र
    पिछले तेईस वर्षों से जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज, इलाहाबाद में दर्शनशास्र का प्राध्यापन कर रही हैं । इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. करने के बाद अस्तित्वादी विचारक ज्याँ पॉल सार्त्र पर इनके शोध पर इसी विश्वविद्यालय द्वारा डीफिल. की उपाधि प्रदान की गयी । राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न सेमिनार एवं गोष्ठियों में इन्होंने अनेक शोधपत्र प्रस्तुत किये तथा 'इंडियन फिलॉसॉफिकल क्वाटरली' व 'परामर्श' सहित अनेक दार्शनिक पत्रिकाओं में इनके लेख प्रकाशित हुए हैं । डॉ. मिश्र ने श्री श्याम किशोर सेठ के साथ 'ज्ञान दर्शन 'Philosophy of Knowledge' ''तर्कशास्‍त्र-एक आधुनिक परिचय एवं ईश्वर, स्वतंत्रता और अमरत्व : एक तत्वदार्शनिक अध्ययन नामक पुस्तकों का लेखन भी किया है । आप ' इंडियन फिलॉसॉफिकल काँग्रेस' और ' अखिल भारतीय दर्शन परिषद' की आजीवन सदस्या हैं ।

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