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  • Pages: 153p
  • Year: 2012
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180317040
  •  
    मार्कण्डेय की अब तक असंकलित कहानियों का संग्रह 'हलयोग' व्यवहार रूप में परिणत होकर अब आपके हाथ में है । इस संग्रह में कुल बीस कहानियाँ हैं । इन कहानियों का कोई क्रम नहीं है, कोशिश बस इतनी है कि ग्रामीण यथार्थ और संवेदना से जुड़ी कहानियाँ शुरू में एक साथ हों । खास बात यह कि इसमें उनकी लिखी पहली कहानी करीबों की बस्ती' और अन्तिम, लिखी जा रही कहानी खुशहाल ठाकुर संकलित है । कुल मिलाकर यह संग्रह भी बदलते समय, जीवन और उसके भीतर के प्रतिरोधी स्वर के बीच मार्कण्डेय की खास राजनीतिक और वैचारिक सचेतनता लिये हुए है ।

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    Markandey

    2 मई, 1930 में बराई गाँव-जिला जौनपुर में जन्में मार्कण्डेय की प्राथमिक शिक्षा गॉव में, आगे  की पढाई प्रतापगढ़ से उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्जित किया ।

    मार्कण्डेय स्वाधीन भारत के कथाकार थे, लेकिन वे गहरे अर्थों में भारतीय सामाजिक चेतना के भी कथाकार रहे है । उन्होंने अपनी कहानी का आरम्भ वहीं से किया जहॉ प्रेमचन्द ने कहानी को छोडा था। प्रेमचन्द की ही तरह मार्कण्डेय भी मूलत: देशज संवेदना के कथाकार थे । प्रेमचन्द की परम्परा से मार्कण्डेय का रिश्ता महज ग्रामीण यथार्थ का ही न होकर उस समूचे सामा-जिल ताने- बाने का भी था जिसके बिना न तो किसी

    पारम्परिक समाज को समझा जा सकता है और न उसके आगत क्री आहटें सुनी जा सकती है । मार्कण्डेय देश के राजनीतिक जनतंत्र का उत्सवीकरण करने के बजाय अपनी कहानियों में उसका सामाजिक और

    आर्थिक क्रिटीक रचते है ।

    कहानियों के अलावा तो उपन्यास 'सेमल के फूल' तथा ‘अग्निबीज’ एकांकी-संग्रह "पत्थर व परछाइयाँ, काव्य-संभ्रह 'सपने तुम्हारे थे' तथा ‘यह पृथ्वी तुम्हें देता हूँ’,  आलोचना ‘कहानी की बात’, ‘नयी कहानी : यथार्थवादी नजरिया, प्रगतिशील साहित्य की जिम्मेदारी, साहित्य संवाद कल्पना में चक्रधर नाम से लिखा गया स्तम्भ ‘चक्रधर की साहित्यकार' नाम से प्रकाशित ।

    निधन : 18 मार्च, 2010 ।

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