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Hindi Aalochana Ka Vikas

Hindi Aalochana Ka Vikas

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  • Pages: 301p
  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180317507
  •  
    भारतेन्दु–युग में जैसे नाटक, उपन्यास, निबंध आदि विभिन्न साहित्यिक विधाओं का रचनारम्भ हुआ, वैसे ही आलोचना का भीµयह एक महत्त्वपूर्ण तथ्य हैय लेकिन और भी अधिक महत्त्व इस बात का है कि हिंदी आलोचना अपने शैशव–काल से ही साहित्य के सामाजिक दायित्वों के प्रति सचेत है । नंदकिशोर नवल प्रगतिशील दृष्टिसंपन्न युवा आलोचकों में अग्रगण्य हैं । इस पुस्तक में उन्होंने हिन्दी–आलोचना के इतिहास को नहीं, विकास को स्पष्ट किया है । पं– बालकृष्ण भट्ट, पं– महावीरप्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, डॉ– रामविलास शर्मा और डॉ– नामवर सिंह की आलोचना–दृष्टि का जो समाजशास्त्रीय अध्ययन इस पुस्तक में किया गया है, उससे यह तथ्य साफ तौर पर उभरकर सामने आता है कि हिन्दी–आलोचना की मुख्य धारा प्रगतिशील रही है और जिसके निर्माण में इन आलोचकों ने अपनी ऐतिहासिक भूमिका निभायी है । वस्तुत% इन्हें और इनके अलावा उन्हीं आलोचकों को लेखक ने अपने अध्ययन का विषय बनाया है ‘जिनके पास साहित्य के सम्बन्ध में एक सुनिश्चित दृष्टिकोण है, या कम–से–कम जिनमें उसे उपलब्ध करने का प्रयास मिलता है, और जिन्होंने हिंदी साहित्य का समग्र या आंशिक रूप में आलोचनात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत किया है ।’ निश्चय ही यह पुस्तक उस वैचारिक संघर्ष का जीवन्त दस्तावेज“ है, जो आधुनिक हिन्दी साहित्य में जनवादी मूल्यों के लिए होता रहा है और जिसे आज के साहित्य–सन्दर्भ में जानना–समझना निहायत जरूरी है ।

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    Madhuresh

    मधुरेश
    जन्म : 10 जनवरी, 1939 को बरेली में एक निम्न-मध्यवित्त परिवार में हुआ। उनकी सारी पढ़ाई वहीं हुई। बरेली कॉलेज, बरेली से अंग्रेजी और हिन्दी में एम.ए.। कुछ वर्ष अंग्रेजी पढ़ाने के बाद लगभग तीस वर्ष शिवनारायण दास पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, बदायूँ के हिन्दी विभाग में अध्यापन। 30 जून, 1999 को सेवानिवृत्त होकर पूरी तरह साहित्य में सक्रिय।
    प्रकाशित कृतियाँ : आज की हिन्दी कहानी : विचार और प्रतिक्रिया, यशपाल के पत्र, सिससिला : समकालीन कहानी की पहचान, क्रान्तिकारी यशपाल : एक समर्पित व्यक्ति (सं.), देवकीनन्दन खत्री (साहित्य अकादमी के लिए), सम्प्रति : समकालीन हिन्दी उपन्यास में संवेदना और सरोकार, रांगेय राघव (साहित्य अकादमी के लिए), राहुल का कथा-कर्म, हिन्दी कहानी का विकास, हिन्दी कहानी : अस्मिता की तलाश, हिन्दी उपन्यास का विकास, नई कहानी : पुनर्विचार, यह जो आईना है (संस्मरण), 'परिवेश' के आलोचक प्रकाश चन्द्र गुप्त पर केन्द्रित अंक के अतिथि सम्पादक, अमृतलाल नागर : व्यक्तित्व और रचना संसार, भैरव प्रसाद गुप्त (साहित्य अकादमी के लिए), मैला आँचल का महत्त्व (सं.), दिव्या का महत्त्व, और भी कुछ, हिन्दी उपन्यास : सार्थ की पहचान, यशपाल के पत्र, कहानीकार जैनेन्द्र कुमार : पुनर्विचार, हिन्दी आलोचना का विकास, मेरे अपने रामविलास, भारतीय लेखक : यशपाल पर केन्द्रित विशेषांक के अतिथि सम्पादक, यशपाल रचना संचयन (सं.) (साहित्य अकादमी के लिए), यशपाल : रचनात्मक पुनर्वास की एक कोशिश, बाणभट्ट की आत्मकथा : पाठ और पुर्नपाठ (सं), यशपाल रचनावली की भूमिकाएँ, माक्र्सवादी आलोचना और फणीश्वर नाथ रेणु (सं.), जुझार तेजा : लज्जाराम मेहता (सं.) रजिया सुल्ताना बेगम उर्फ  रंग महल में हालाहल : किशोरी लाल गोस्वामी (सं.), अश्क के पत्र, सौन्दर्योपासक ब्रजनन्दन सहाय (सं.)।
    सम्मान : समय माजरा सम्मान, राजस्थान (2004), गोकुल चन्द्र शुक्ल, आलोचना पुरस्कार, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल शोध संस्थान, वाराणसी (2004), राज्यपाल/कुलाधिपति द्वारा महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय की कार्य परिषद् में नामित (2009)।
    सम्पर्क : 372, छोटी बमनपुरी, बरेली-243003
    फोन : (0581) 2554670   मोबा. 9319838309

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