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Hindi Kahaniyon Ki Shilp-Vidhi Ka Vikas

Hindi Kahaniyon Ki Shilp-Vidhi Ka Vikas

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  • Pages: 266p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789389243420
  •  
    हिंदी कहानी-साहित्य अन्य साहित्यांगो की अपेक्षा अधिक गतिशील है । मासिक और साप्ताहिक पत्र-पत्रिकाओं के नियमित प्रकाशन ने इस साहित्य के विकास में बहुत अधिक योग दिया है । फलस्वरुप कहानी-साहित्य में सर्वाधिक प्रयोग हुए हैं और कहानी किसी निर्झरिणी की गतिशीलता लेकर विविध दिशाओं में प्रवाहित हुई है । इस वेग में मर्यादा रहनी चाहिए । बरसात में किसी नदी के किनारे कमजोर हों तो गाँव और नगर में पानी भर जाता है । इसलिए वेग को विस्तार देने की आवश्यकता है । प्रवाह में गंभीरता आणि चाहिए । मनोरंजन की लहरें उठाने वाला कहानी-साहित्य, तट को तोड़कर बहने वाला साहित्य नहीं है । उसमें जीवन की गहराई है--जीवन का सत्य है । दिग्वधू को घंश्यमल केशराशि में सजा हुआ इंद्राधनुष बालकों का कुतूहल ही नहीं है, वह प्रकृति का सत्य भी है । कितनी प्रकाश-किरणों ने जीवन की बूदों से ह्रदय में प्रवेश कर इस सौन्दर्य-विधि में अपना आत्म-समर्पण किया है । कहानी के इस सत्य को समझने की आवश्यकता है । डॉ. लक्ष्मीनारायण लाल के इस ग्रन्थ से मैं आशा करता हूँ कि साहित्य-जगत का उत्तरोत्तर हित होगा और विद्वान लेखक का भावी पथ अधिक प्रहस्त बनेगा ।

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    Laxmi Narayan Lal

    डॉ लक्ष्मीनारायण लाल

    शिक्षा : एम्.ए., पी-एच.डी ।

    साहित्य सेवा :

    नाटक -अन्धा कुआँ, मादा कैक्टस, सुन्दर रस, सूखा सरोवर, नाटक तोता मैना, रातरानी, दर्पण, सूर्यमुख, कलंकी, मिस्टर अभिमन्यु, कर्फ्यू, दूसरा दरवाजा, अब्दुल्ला दीवाना, यक्ष प्रश्न, व्यक्तिगत, एक सत्य हरिश्चंद्र, सगुन पंछी, सब रंग मोहभंग, राम की लड़ाई, पञ्च पुरुष, लंका कांड, गंगा माटी, नरसिंह कथा, चन्द्रमा

    एकांकी संग्रह-पर्वत के पीछे, नाटक बहुरूपी, ताजमहल के आंसू, मेरे श्रेष्ठ एकांकी ।

    उपन्यास - धरती की आँखे, बया का घोंसला और सांप, काले फूल का पौधा, रूपाजीवा, बड़ी चंपा छोटी चंपा, मन वृन्दावन, प्रेम एक अपवित्र नदी, अपना-अपना राक्षस, बदके भैया, हरा समंदर गोपी चंदर, वसंत की प्रतीक्षा, श्रृंगार, देवीना, पुरुषोत्तम ।

    कहानी-संग्रह- आने वाला कल, लेडी डॉक्टर, सूने आँगन रस बरसै, नये स्वर नयी रेखाएँ, एक और कहानी, एक बूँद जल, डाकू आये थे, मेरी प्रतिनिधि कहानियाँ

    शोध एवं समीक्षा-हिंदी कहानियों की शिल्प-विधि का विकास, आधुनिक हिंदी कहानी, रंगमंच और नाटक की भूमिका, पारसी हिंदी रंगमंच, आधुनिक हिंदी नाटक और रंगमंच, रंगमंच : देखना और जानना ।

    सम्मान : सन 1977 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा श्रेष्ठ नाटककार, सन 1979 में साहित्य कला परिषद् द्वारा तथा सन 1987 में हिंदी अकादमी द्वारा साहित्यिक योगदान के लिए पुरस्कृत हुए ।

    निधन : 20 नवम्बर 1987 ई. ।

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