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Hindi : Kuchh Nai Chunotiyan

Hindi : Kuchh Nai Chunotiyan

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  • Pages: 377p
  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180318153
  •  
    सुप्रसिद्ध कथाकार, ललित निबंधकार डॉ० विवेकीराय अपनी एक सुप्रसिद्ध पुस्तक में लिखते हैं कि - ' 'डॉ० कैलाश नाथ पाण्डेय का लेखन गंभीर विषयों का स्पर्श करता है । आप मूलत: भाषा-वैज्ञानिक हैं । '' जाहिर है, कोई भी भाषा-वैज्ञानिक किसी भी भाषा पर निरपेक्ष दृष्टि से विचार करता है । डॉ० पाण्डेय ने भी इस पुस्तक में वही किया है । इनका मानना है कि बाजार के दबाव के कारण कुछ समय के लिए हिन्दी भले ही फलकजद हो जाय, किन्तु तमाम तरह के अन्तर्विरोधों के बावजूद आज भी यह इस देश के बहुत बड़े जन समुदाय की लचीली और उदार भाषा है । विस्तारवादी अंग्रेजी की अफीम फांक उसमें ऊभने-चूभने वाले भले ही हिन्दी को खालिस देसी और निठल्ली-पिछड़ी, गँवारू- अवैज्ञानिक भाषा घोषित करने की मुनादी करें, पर यह सच है कि अपनी ताकत के बल पर इसने नई बन रही दुनियाँ में अपनी पुख्ता और मुकम्मल जगह बना ली है । सच तो यह है कि हिन्दी ही नहीं, प्रत्येक भारतीय भाषा को आज अमेरिका की भूमंडलीय शक्ति और ब्रिटेन की साम्राज्यवादी तथा पूँजीवादी व्यवस्था की पोषक, संवेदना-रहित अंग्रेजी से जूझना पड़ रहा है । इस आयातित विदेशी भाषा के साथ कई तरह के कूर और अनैतिक संबन्धों के अंधड़ भी इस देश में आ गए हैं । यही समय-समय पर हिन्दी से ताल ठोंक उसे चुनौती देते रहते हैं । अत: ऐसी स्थिति में आज जरूरत है, हमें यह सोचने की, कि स्वतंत्रता संग्राम की सांस्कृतिक, भू-राजनैतिक और आर्थिक स्तर पर तेज आवर्त्त वाली भाषा हिन्दी का स्वरूप कैसे बचा रहसके?

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    Kailash Nath Pandey

    डॉ. कैलाश नाथ पाण्डेय

    डॉ. कैलाश नाथ पाण्डेय की ख्याति एक चर्चित भाषा-वैज्ञानिक के रूप में है । आप गाजीपुर जनपद की सैदपुर तहसील स्थित ग्राम-रामपुर माँझा के निवासी हैं । आपने बी.ए., स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) तथा एम.ए. केन्दीय विश्वविद्यालय सागर (मध्य प्रदेश) से उत्तीर्ण किया । लगभग चालीस वर्षों तक हिन्दी-अध्यापन के पश्चात् स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मलिकपुरा, गाजीपुर के हिन्दी विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त ।

    आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं-‘भाषा विज्ञान का अनुशीलन', भाषा विज्ञान का रसायन, 'हिन्दी : कुछ नई चुनौतियाँ' , 'सन्त सुन्दरदास', ‘उर्दू : दूसरी राजभाषा', ‘प्रयोजनमूलक हिन्दी की नई भूमिका', कार्यालयीय हिन्दी, हिन्दी पत्रकारिता : संवाद और विमर्श, हिन्दी आलोचना का अन्त:पाठ, 'प्रयोजनमुलक हिन्दी की संकल्पना' आदि ।

    आप उदय नारायण तिवारी स्मृति सम्मान, पाणिनी पुरस्कार, श्यामसुन्दर दास पुरस्कार, सारस्वत सम्मान आदि से सम्मानित किये जा चुके हैं ।
    सम्पर्क : नवकापुरा, लंका, गाजीपुर, उ.प्र. ।

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