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Prachin Bharat Mein Nagar Tatha Nagar Jivan

Prachin Bharat Mein Nagar Tatha Nagar Jivan

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  • Pages: 404p
  • Year: 2010
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180314728
  •  
    इस ग्रंथ में आरम्भ से लेकर बारहवीं शती ई. तक 'प्राचीन भारत में नगर तथा नगर-जीवन' विषय का विशद् एवं रोचक ऐतिहासिक परिचय पहली बार प्रस्तुत किया गया है । इस ग्रंथ के प्रथम तीन अध्यायों में आज से लगभग साढ़े चार हजार वर्षों पूर्व ताम्राश्म- काल में प्रथम नगरीय सभ्यता का स्वदेशी उद्‌भव एवं प्रारम्भिक विकास, हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो-सदृश प्रथम नगरों के सन्निवेश का मौलिक स्वरुप, पाश्चात्य समकालीन नगरों की तुलना में उनके निर्माण की उत्कृष्टता, कालान्तर में लौह काल में द्वितीय पुर-कान्ति के साथ गांगेय उपत्यका में नगरीकरण की प्रक्रिया का आरम्भ, नगर-सन्निवेश की विकसित शैली तथा नगर- तत्वों के नवीन विकास और समावेश के विवरण प्राप्य हैं । तदुपरान्त चतुर्थ से लेकर ग्यारहवें अध्याय तक देश के लगभग पचास प्रतिनिधि नगरों का तिथिक्रम के अनुसार ऐतिहासिक परिचय, नगर एवं गृह-निर्माण की वैज्ञानिक पद्धति, भारतीय अभियन्ताओं की मौलिक सूझ-बूझ तथा नगर-शासन की विशेषताओं का परिचय उपलब्ध होता है । बारहवें से पन्द्रहवें अध्याय तक नगरों का आर्थिक जीवन एवं संघटन, सामाजिक, भौतिक एवं सांस्कृतिक जीवन की विशेषताओं का विश्लेषण, प्राचीन भारतीय कला में नगरीय रुपांकन तथा समग्र परिशीलन का सारगर्भित निष्कर्ष प्राप्य है । नवीनतम साक्ष्यों के आधार पर इस रचना को अधिकाधिक सज्य बनाने का प्रयास किया गया है । इसका प्रत्येक अध्याय सम्यक् पठनीय तथा नवीन तथ्यों से भरपूर एवं ऋद्ध है । अद्यतन पुरातत्वीय साक्ष्यों से मंडित सटीक चित्रफलक, मानचित्र एवं युक्तियाँ विवेचन को अधिकाधिक प्रामाणिक, रोचक एवं सारगर्भित बनाने के उद्देश्य से यथास्थान संयुक्त है । आशा एवं विश्वास है कि अपने वर्तमान स्वरुप में यह अन्य पहले से अधिक उपादेय एवं अपने अभीष्ट की पूर्ति में सफल सिद्ध हो सकेगा ।

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    Udai Narayan Rai

    डॉ. उदयनारायण राय

     जन्म : १९२८ ई., ग्राम बनकटा, जनपद-गोरखपुर।

    शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा गोरखपुर से। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. १९५१ ई. एवं डॉक्टर ऑफ फिलासफी  की  उपाधि  १९५७  ई.। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ही इतिहास-विभाग तथा तदुपरान्त प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग में क्रमानुसार लेक्चरर, रीडर, प्रोफेसर  एवं विभागाध्यक्ष। १९८९ ई. में अवकाश ग्रहण। 

    गतिविधियाँ : भारतीय इतिहास अनुसन्धान परिषद् के सीनियर रिसर्च फेलो, अगस्त १९८९ ई. से। १९९१ ई. प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर इमेरिटस दिसंबर १९९१ से जून १९९३ ई.।

    पुरस्कार एवं सम्मानोपाधियाँ : मंगलाप्रसाद पारितोषिक, आचार्य नरेन्द्रदेव पुरस्कार, इमेरिटस फेलोशिप, विद्याभूषण सम्मान (उत्तर प्रदेश, हिन्दी संस्थान लखनऊ), साहित्यवाचस्पति (मानद डी.लिट्.), इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लगभग ४० वर्षों तक अनुसन्धान-कार्य का पर्यवेक्षण, अनेक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में भाग एवं अध्यक्षता, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक प्रसंगों में विदेशी राज्यों का पर्यटन—सोवियत भूमि (रूस), तुर्कमेनिस्तान (अश्काबाद), उज्बेकिस्तान (ताशकन्द), संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, इंग्लैण्ड, वेल्स, प्रâांस। पिछले पाँच दशकों से हिन्दी सेवा, दस प्रकाशित ग्रन्थ, साठ से अधिक शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।

    निधन : १६ नवम्बर, २००७

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