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Shalbhanjika

Shalbhanjika

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  • Pages: 74p
  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180316586
  •  
    ‘शालभञ्जिका’ शब्द प्राचीन भारतीय कला की एक विशेष लोकप्रिय ललित मुद्रा का वाचक था। इसके ज्वलन्त उदाहरण भारत के विविध ऐतिहासिक केन्द्रों से प्राप्य हैं, जिसमें उच्चित्रित सुन्दरी अपने एक हाथ से वृक्ष-शाखा को नमित एवं दूसरा कटि-प्रदेश पर अलम्बित करती त्रिभङ्ग मुद्रा में विलसित है। कला के अतिरिक्त संस्कृत, पालि एवं प्राकृत साहित्य में भी इस ललित कला-मुद्रा का प्रचुर निरूपण प्राप्य है। इससे विशेष रूप से प्रभावित होनेवाले कवियों, लेखकों एवं समीक्षकों में अश्वघोष, कालिदास, श्रीहर्ष, बाणभट्ट, राजशेखर एवं गोवर्द्धनाचार्य उल्लेखनीय हैं। इनके ग्रन्थों में प्राप्य तत्सम्बन्धी विवरण कला, इतिहास एवं दर्शन की दृष्टि से रोचक, सारगर्भित एवं ज्ञानवर्द्धक हैं। भारतीय कला के मर्मज्ञ डॉ. उदय नारायण राय ने प्राचीन ग्रन्थों का मन्थन कर साहित्यिक एवं पुरातत्त्वीय साक्ष्यों में सुन्दर सामञ्जस्य स्थापित करते हुए प्रस्तुत ग्रन्थ में इस ललित कला-मुद्रा का विस्तृत ऐतिहासिक परिचय एकत्र उपलब्ध कराने का अभिमत प्रयास किया है।

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    Udai Narayan Rai

    डॉ. उदयनारायण राय

     जन्म : १९२८ ई., ग्राम बनकटा, जनपद-गोरखपुर।

    शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा गोरखपुर से। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. १९५१ ई. एवं डॉक्टर ऑफ फिलासफी  की  उपाधि  १९५७  ई.। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ही इतिहास-विभाग तथा तदुपरान्त प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग में क्रमानुसार लेक्चरर, रीडर, प्रोफेसर  एवं विभागाध्यक्ष। १९८९ ई. में अवकाश ग्रहण। 

    गतिविधियाँ : भारतीय इतिहास अनुसन्धान परिषद् के सीनियर रिसर्च फेलो, अगस्त १९८९ ई. से। १९९१ ई. प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर इमेरिटस दिसंबर १९९१ से जून १९९३ ई.।

    पुरस्कार एवं सम्मानोपाधियाँ : मंगलाप्रसाद पारितोषिक, आचार्य नरेन्द्रदेव पुरस्कार, इमेरिटस फेलोशिप, विद्याभूषण सम्मान (उत्तर प्रदेश, हिन्दी संस्थान लखनऊ), साहित्यवाचस्पति (मानद डी.लिट्.), इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लगभग ४० वर्षों तक अनुसन्धान-कार्य का पर्यवेक्षण, अनेक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में भाग एवं अध्यक्षता, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक प्रसंगों में विदेशी राज्यों का पर्यटन—सोवियत भूमि (रूस), तुर्कमेनिस्तान (अश्काबाद), उज्बेकिस्तान (ताशकन्द), संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, इंग्लैण्ड, वेल्स, प्रâांस। पिछले पाँच दशकों से हिन्दी सेवा, दस प्रकाशित ग्रन्थ, साठ से अधिक शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।

    निधन : १६ नवम्बर, २००७

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