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Kavya Chayanika

Kavya Chayanika

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  • Pages: 204
  • Year: 2015
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352210466
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    बिगड़ते पर्यावरण की समस्या आज मनुष्य के लिए भूख के बाद दूसरी सबसे बड़ी समस्या है ! भूक जिस तरह एक देह के अस्तित्व के लिए आसन्न खतरा होती है उसी तरह पर्यावरण-विनाश सृष्टि के अस्तित्व के लिए होता है ! एक-एक व्यक्ति के रूप में जी रहे हम लोगों की आँखों से वह खतरा भले ही इतने स्पष्ट और ठोस रूप में न दिखाई देता हो, और भले ही हम बीच-बीच में प्रकृति द्वारा दी जानेवाली चेतावनियों को नजर अंदाज करने की ढीठता भी जुटा लेते हों, लेकिन जल, जमीन, हवा और हरियाली का सतत क्षरित होता जीवन उन निगाहों से अनचीन्हा नहीं रह जाता जो प्रस्तुत उल्लास की झीनी चदरिया के पार दूर क्षितिज के धुंधलके में लिखी जा रही नाश-विनाश की पटकथाओं की पंक्तियाँ पढ़ लेती हैं, यानी कवियों और रचनाशील हृदयों की निगाहें ! यह पुस्तक प्रकृति और कवि के इसी अपने, और समाज की रिश्तेदारियों के धोखादेह प्रपंच से परे, उनके निहायत पवित्र और निजी रिश्ते का दस्तावेज है ! पाठकगण इस किताब को सरकारों और संस्थाओं के रस्मी पर्यावण-प्रेम और शुष्क रूदन के काव्यानुवाद के रूप में न लें ! यह समष्टि-मन के रचनाकुल और ईमानदार स्नायुओं की पीड़ाजनित प्रतिक्रियाओं का संकलन है जिसमें हिंदी के नए-पुराने, वरिष्ठ, श्रेष्ठ और सजग रचनाकारों ने प्रकृति के साथ अपनी सम्बन्ध-यात्रा के सबसे चिंतित क्षणों को वाणी दी है ! संग्रह में एक सौ एक समकालीन कविताएँ और पैतालीस कवि शामिल हैं ! कौन छोटा है, कौन बड़ा है, यह सवाल अप्रासंगिक है ! क्योंकि कविता का विषय महत्तपूर्ण है, समस्याओं की भयंकरता प्रासंगिक है ! एक ही त्रासदपूर्ण मुददा सबके लिए महत्पूर्ण है ! सब में आशंकाएं हैं तो साथ ही आशाएं भी हैं ! प्रकृति की आसन्न-मृत्यु पर चीखने से बढ़कर प्रतिरोध खड़ा कर देना ये रचनाकार अपना दायित्व समझते हैं !

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    Dr. Pramod Kovaprat

    डॉ. प्रमोद कोवप्रत

    जन्म : 1973 केरल के कन्नूर जिले के इरिणव् गाँव में !

    शिक्षा : एम्.ए. हिंदी, एम्.ए. अंग्रेजी, नेट (उ.जी.सी.), बी.एड., अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, पी-एच.डी. हिंदी !

    प्रकशित पुस्तकें : आलोचना : भारतीय जीवन-मूल्य और ज्ञानपीठ पुरस्कृत हिंदी कवि, समकालीन हिंदी कविता का ताप-मां, शताब्दी कवि-धरती और धड़कन, हिंदी गद्य विमर्श के लिए नए क्षितिज;

    संपादन : इक्कीसवीं सदी में अनुवाद : दशाएं और दिशाएं, हिंदी साहित्य-समय से साक्षात्कार, हिंदी दलित साहित्य का विकास, हिंदी साहित्य : समकालीन परिप्रेक्ष्य, समकालीन हिंदी साहित्य और नए विमर्श !

    सम्मान/पुरस्कार : केन्द्रीय हिंदी निदेशालय (भारत सरकार) का 'हिंदीतर भाषी हिंदी लेखक पुरस्कार', धामपुर (उ.प्र.) से 'साहित्य गौरव सम्मान', वाराणसी (उ. प्र.) से 'यास्क पुरस्कार', नाथ द्वारा (राजस्थान) 'इंडी भाषा भूषन सम्मान', लालसोट (राजस्थान) से 'अनुराग साहित्य सम्मान', बिहार से 'विद्यावाचस्पति सम्मान', भीलवाडा (राजस्थान) से 'राष्ट्रीय साहित्यांचल सृजन सम्मान' !

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