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Meera Ka Jeevan

Meera Ka Jeevan

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  • Pages: 136
  • Year: 2015
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352210275
  •  
    मीरां के जीवन में रुचि रखनेवाले पाठकों के लिए यह पुस्तक न केवल मीरां की एक प्रमाणिक जीवनी है वरन यह जीवनी, इतिहास दृष्टि से परिपूर्ण एवं महत्तपूर्ण शोध निष्कर्षों का समन्वित परिणाम है ! यह पुस्तक बताती है कि मीरां के लिए कृष्ण भक्ति एक साधन थी न कि साध्य ! कृष्ण भक्ति का सहारा लेकर मीरां ने मध्यकालीन सामंती समाज में व्याप्त सती-प्रथा जैसी तमाम सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया एवं स्त्री स्वतंत्रता के पक्ष में विद्रोह का स्वर बुलंद किया ! यह पुस्तक ब्राह्मण कथाकारों एवं परवर्ती आलोचकों द्वारा निर्मित मीरां की उस पारंपरिक छवि को तोडती है जो उसे केवल प्रेम-दीवानी कवयित्री की परिधि में सीमित कर देना चाहते थे ! निश्चय ही, मीरां को समग्र रूप से समझने में यह पुस्तक सहायक सिद्ध होगी !

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    Arvind Singh Tejawat

    अरविन्द सिंह तेजावत

    मीरां के चर्चित शोधार्थी अरविन्द सिंह तेजावत का जन्म 26 जुलाई, 1978 को राजस्थान के एक परम्परावादी राजपूत राव परिवार में हुआ ! विद्यालयी एवं विश्वविद्यालयी शिक्षा उदयपुर नगर से ग्रहण करने के पश्चात् जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय से उन्होंने एम्.फिल. एवं पी-एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं !

    लेखकीय जीवन का आरम्भ एक संपादक-पत्रकार के रूप में करने के पश्चात् वर्तमान में वे हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य के रूप में कार्यरत हैं ! तेजावत राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी-विभाग के संस्थापक सदस्य हैं जहाँ उन्होंने दो वर्ष तक सहायक आचार्य के रूप में अध्यापन किया ! इससे पूर्व वे दिल्ली विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों एवं दिल्ली के कुछ अनुसन्धान संस्थानों में कार्यरत थे !

    तेजावत पिछले एक दशक से मीरांबाई एवं मध्यकालीन साहित्य, समाज एवं संस्कृति से जुड़े विषयों पर शोधरत हैं ! उन्हें गंभीर शोधार्थी, सजग लेखक एवं समर्पित अध्यापक माना जाता है ! अब तक वे देश एवं विदेश में मीरां, मध्यकालीन साहित्य एवं संस्कृति से सम्बंधित अनेक व्याख्यान दे चुके हैं ! साहित्यिक, सामाजिक एवं राजनितिक विषयों पर तेजावत समाचार-पत्रों एवं पत्रिकाओं के नियमित लेखक हैं !

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