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Sifar Se Shikhar Tak

Sifar Se Shikhar Tak

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  • Pages: 160p
  • Year: 2014
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180319297
  •  
    अपने चेहरे पर अवध के देहातों की मासूमियत और होंठों पर हर वक्त एक मेहमाननवाज मुस्कुराहट लिये, आंखों में हमेशा इंतजार के चिराग जलाए, दोस्तों के कदमों पर कान लगाए और कविता तथा शायरी को सीने से लगाए हुए शख्स का नाम है ए.पी. मिश्र। 'सिफर से शिखर तक’ एक ऐसे शख्स की कहानी है जो अपनी तहजीबी विरासत, संस्कारों और जद्दोजहद के बल पर अब एक शख्सियत बन चुका है। गांव की धूप-छांव ने उनके चेहरे की शरीफाना मासूमियत को बरकरार रखा है। ब्यूटीपार्लर कितनी ही तरक्की क्यों न कर जाए लेकिन गांव का अल्हड़पन और सादा-मिजाजी उसका मुकद्दर नहीं बन सकती। महात्मा-मिजाज शायर अंगद जी महाराज की कुरबत और सोहबत ने उन्हें उस मासूम बच्चे जैसा बना दिया जो कभी कुंभ के मेले में खो जाता है और कभी महाकुंभ में मिल जाता है। लेकिन उस बच्चे के हाथ में खिलौने नहीं होते, उसके हाथों में होती है मीर, कबीर, तुलसी और गालिब की अमानत। अपनी बेपनाह मसरूफियतों के बावजूद ताजादम रहना, पराये गमों की चादर ओढ़े हुए मुस्कुराते रहना दुश्वार है लेकिन 'सिफर से शिखर तक’ के शिल्पकार का यही तो हुनर है कि वह जंगली फूलों से शहर को आबाद करना जानता है। अंधेरे से जंग करते हुए उसे कई दहाइयां गुजर गई हैं लेकिन आज तक न तो उसके हाथों में कंपकंपाहट है और न चेहरे पर थकान। यूं तो कुछ लोग किताबें लिखते हैं और कुछ खुद किताब होते हैं। उनके जीवन का हर दिन एक वरक होता है और हर बरस एक दास्तान। ऐसे ही लोगों को दुनिया सूफी, संत और कलंदर मान लेती है। ऐसे लोग दूसरों पर अहसान करके भी आंखें नीची रखते हैं। 'सिफर से शिखर तक’ एक संत-मिजाज की जीवनी है लेकिन इस जीवनी के ढेर सारे पन्नों में ऐसे बहुत से चेहरे शामिल हैं जो ए.पी. मिश्र को संजीवनी मान लेते हैं। काश, इसी कतार में कहीं हम भी खड़े दिखाई दे जाएं— तेरे अहसान की ईंटें लगी हैं इस इमारत में, हमारा घर तेरे घर से कभी ऊंचा नहीं होगा। —मुनव्वर राना

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    Ayodhya Prasad Mishra

    ए.पी. मिश्र (अयोध्या प्रसाद मिश्र)

    जन्म-तिथि : 2 जुलाई, 1953

    जन्म-स्थान : ग्राम कोचवा (खन्ता), जिला गोंडा।

    पिता : स्वर्गीय श्री शिव नारायण मिश्र (मुन्ना मिश्र)।

    माता : स्वर्गीया श्रीमती राजपति।

    शिक्षा : मदनमोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज, गोरखपुर से बी.ई.—इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एल.एल.बी.।

    दक्षता के सोपान : पहली तैनाती—मेघालय राज्य विद्युत परिषद शिलांग में सहायक अभियंता के रूप में। 8 सितंबर, 1976 को उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद में सहायक अभियंता नियुक्त। सेवा के दौरान प्रयाग में आयोजित पांच बार कुंभ और महाकुंभ में तैनाती। बिजली के कुशल प्रबंधन के लिए प्रत्येक बार पुरस्कृत और प्रशंसित। नोएडा और गाजियाबाद में अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता के रूप में तैनाती। कुछ दिनों तक पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम, मेरठ में निदेशक (तकनीकी) के पद पर।

    संप्रति : मध्यांचल, पूर्वांचल और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक।

    पता : बी-1/41, सेक्टर-जे, अलीगंज, लखनऊ

    सम्पर्क : 94 159 11111

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