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Muktibodh : Sarjak Aur Vicharak

Muktibodh : Sarjak Aur Vicharak

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  • Pages: 312p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789389243673
  •  
    उत्तर नेहरू-युग में जैसे-जैसे भारतीय लोकतंत्र ज़नहिंतों से निरपेक्ष होता गया है, वैसे-वैसे साहित्य मुखर रूप से लोकतंत्र के भीतर काम कर रही जन-विरोधी शक्तियों के कठोर आलोचक के रूप में सामने आया है । इसी क्रम में मुक्तिबोध की रचनाएँ और विचार हिन्दी में केद्रीय होते गए हैं । पारंपरिक रसवादी और रोमैंटिक आग्रहों के समानांतर आधुनिक साहित्य ने विचार और बौद्धिकता को केद्रीय महत्त्व दिया है । इस संघर्ष में मुक्तिबोध के रचनात्मक और वैचारिक प्रयासों की महती भूमिका है । प्रो. सेवाराम त्रिपाठी की पुस्तक ‘मुक्तिबोध : सर्जक और विचारक' मुक्तिबोध का विवेचन-मूल्यांकन समग्रता से करती है । मुक्तिबोध की रचनात्मकता कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, आलोचना और पत्रकारिता तक फैली हुई है । इस पुस्तक का महत्त्व यह है कि वह मुक्तिबोध का अध्ययन करने के लिए सभी विधाओं को समेटती है । स्वाभाविक ही है कि ऐसे में लेखक ने मुक्तिबोध के सभी पक्षों पर विस्तृत विचार किया है । सेवाराम त्रिपाठी ने प्रस्तुत पुस्तक में मुक्तिबोध की सर्जना में विचारधारा की भूमिका की पड़ताल की है । मुक्तिबोध हिंदी-रचनाशीलता में एक मुकम्मल और सुसंगत मार्क्सवादी थे । इसका गहरा प्रभाव विशेष रूप से कविता और आलोचना जैसी विधाओं पर पडा है । यह प्रभाव सामान्य न होकर जटिल है । लेखक ने पुस्तक में मुक्तिबोध में उपस्थित रचना और विचारधारा की अंतःक्रिया पर गहन और सूक्ष्म विवेचन किया है । प्रस्तुत संस्करण पुस्तक का दूसरा संस्करण है । इसमें ‘मुक्तिबोध : पुनश्च' शीर्षक से चार नए आलेख जोड़ दिए गए हैं । इन आलेखों में मूल अध्यायों में छूट गई कुछ महत्त्वपूर्ण बातें स्थान पा सकी हैं । पुस्तक न सिर्फ गंभीर अध्येताओं की ज़रूरतों को पूरा करती है, बल्कि सामान्य विद्यार्थियों के लिए भी उपादेय है ।

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    Sewaram Tripathi

    सेवाराम त्रिपाठी

    22 जुलाई 1951 को ग्राम जमुनिहाई, जिला सतना (मध्यप्रदेश) में जन्म ।

    1972 से 2016 तक मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विमाग में प्राध्यापक के रूप में कार्य ।

    दो वर्ष तक मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, गोपाल में संचालक और संयुक्त संचालक के दायित्वों का निर्वहन ।

    1970 से कविताएँ लिख रहे है । पहला कविता-संग्रह ‘अँधेरे के खिलाफ़' 1983 में और दूसरा ‘खुशबू बॉटतीं हवा' 2016 में प्रकाशित । बघेली लोक-स्राहित्य और संस्कृति पर केद्रित पुस्तक ‘बघेली : अंतरंग अंतर बहिरंग' 2016 में प्रकाशित ।

    'वसुधा' के बीस से अधिक अंकों में सह संपादक तथा दस से अधिक पुस्तकों के संपादन-मंडल में ।

    कविताओं के साथ आलोचना के क्षेत्र में कार्य । ‘मुक्तिबोध : संर्जक और विचारक' पुस्तक 2001 में प्रकाशित तथा मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल के आचार्य नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार से सम्मानित । आलोचनात्मक-वैचारिक निबंधों की पुस्तक ‘हर समय एक सपना जागता है' तथा समय, समाज और मीडिया पर केंद्रित पुस्तक ‘समय के सुलगते सरोकार' 2019 में प्रकाशित ।

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