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Nadi Lahar Aur Toofan

Nadi Lahar Aur Toofan

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  • Pages: 236p
  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180316562
  •  
    श्रीमती शान्तिकुमारी बाजपेयी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की वरिष्ठ अध्यापिका हैं। उनका चित्त संवेदनशील है। उनमें गुरु की गम्भीरता और भावुक की सहृदयता दोनों ही हैं। अपने समाज में और परिवार में आए दिन व्यक्तियों का जो संघर्ष हुआ करता है और अप्रत्याशित रूप से मानस-ग्रन्थियाँ बनती रहती हैं, उनसे अनेक प्रकार की पारिवारिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। श्रीमती बाजपेयी ने इन समस्याओं का अध्ययन गम्भीरता के साथ किया है। ‘नदी लहरें और तूफ़ान’ उनका दूसरा उपन्यास है। इसमें एक समृद्ध ब्राह्मण परिवार का बड़ा ही सजीव चित्रण है। दादी इस परिवार की केन्द्रीय शक्ति हैं। उन्हीं के इशारे पर सबको चलना पड़ता है। परन्तु उनमें स्नेह और ममता इतनी अधिक है कि उनके बच्चे स्नेह के बल पर अपने मन की मनवा लेते हैं। दादी का चरित्र बहुत ही जीवन्त होकर उभरा है। वे पुरानी रूढ़ियों और परम्पराओं से आक्रान्त हैं लेकिन खानदान की मर्यादा की रक्षा के लिए सदा जागरूक हैं। इस उपन्यास के नारी पात्र अधिक सशक्त हैं। लक्ष्मी का चरित्र तो अविस्मरणीय है। अपमान, उपेक्षा के बीच में स्थिर दीप-शिखा की तरह वह जलती रहती है और कठिन अवसरों पर परिवार को कठिन समस्याओं से उबारने का मार्ग भी दिखाती है। लक्ष्मी का पति उत्तम, नायक उतना नहीं है जितना नेय है। वह अपनी प्रथम पत्नी पार्वती से प्रेम करता है, उसे वचन भी देता है कि उसके जीवन में और कोई नारी पत्नी रूप में नहीं आ सकती। लेकिन दादी के दबाव से लक्ष्मी से फिर विवाह करता है। विवाह भी करता है लेकिन उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करने में समर्थ भी नहीं होता। बाद में जब लक्ष्मी की ओर उन्मुख भी होता है तो अकारण उत्पन्न मानसिक ग्रन्थियों से बिदक जाता है। इस प्रकार वह शुरू से अन्त तक कमज़ोर चरित्र का पात्र बना रहता है। लक्ष्मी और दादी इस उपन्यास के बहुत सशक्त पात्र हैं। कठिन-से-कठिन परिस्थितियों में धैर्य और विवेक रखने वाली लक्ष्मी सचमुच गृह-लक्ष्मी है। - डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदीघुँघरू

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    Shanti Kumari Bajpai

    जन्म: 2 अक्टूबर, 1919, बरेली (उत्तर प्रदेश)।

    शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय; प्रारम्भिक शिक्षा महिला कॉलेज, लखनऊ।

    अध्यापन: महिला महाविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (1948 से 1976)।

    प्रकाशित कृतियाँ:

    उपन्यास: व्यवधान, नदी लहरें और तूफ़ान, फूल पराग पंखुड़ियाँ, अरे! यह कैसा मन, घुँघरू

    हिन्दी साहित्य विवेचना: केशव की रामचन्द्रिका पर एक : ष्टि; मैथिलीशरण गुप्त: कवि का कृतित्व

    लघु नाटिका: घर भी एक क्यारी है

    स्वर्गारोहण: 28 जनवरी, 2005 लखनऊ (उत्तर प्रदेश)।

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