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Nalanda Par Giddh

Nalanda Par Giddh

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  • Pages: 152p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789389243161
  •  
    क्षमा करो है वत्स ! तुम उस कहानी को देखो कि उसमें विधाओं की कितनी खूबसूरत मिक्सिग है । उसमें व्यक्ति चरित्र भी है, संस्मरण भी है, कहानी भी है बहुत कुछ क्रूर धटनाएँ भी हैं, अपनी क्रूरताओं का वर्णन भी है-पत्नी के प्रति और अन्य चीजों के प्रति, बच्चे के प्रति वहुत ही जबरदस्त वात्सल्य भी है । जैसा उस कहानी में हुआ है, वैसे वात्सल्य का चित्रण तो बहुत कम देखने को मिलता है । इस तरह बहुत सारी गद्य विधाओं को मिलाकर उसने सचमुच कहानी का एक नया रसायन इस शताब्दी के अन्त में क्षमा करी है वत्स मे तैयार किया है । यह कहानी एक प्रस्थान बिन्दु है । चुनौती देती है कि कहानी का ढाँचा तोड़कर केसे एक नया ढाँचा तैयार किया जा सकता है । --दूधनाथ सिंह देवेन्द्र की कहानी क्षमा करो हे वत्स ! इत्तेफाक ही है कि इस शीर्षक का कभी सॉनेट मैंने लिखा था और बेटे के जन्मदिन पर लिखा था कि क्षमा मत करो वत्स, आ गया दिन ही ऐसा/आँख खोलती कलियाँ भी कहती हैं पैसा। वह शीर्षक वहाँ से लिया गया है, इस वजह से नहीं पसंद है वह। कविता कुछ और कहती है, मेरी व्यथा कुछ और थी। देवेन्द्र की व्यथा उससे बहुत बड़ी व्यथा थी। वह चीज छूती है, कहलाती है। वह दर्द है, दुख है, लेकिन बड़ा गुस्सा है। एक दूसरी कहानी शहर कोतवाल की कविता है। कहानी को पढ़ने के बाद तिलमिला जाता है जी, कि यह वही कोतवाल है जो आज गुजरात में हैं तो आज गुजरात में, ऐसे ही कोतवाल, इंस्पेक्टर और पुलिस कमिश्नर लोग जो तमाम सत्ता के प्रतीक हैं, प्रतिनिधि हैं। जब भी कहानी लिखी जाएगी इसी तरह की कहानी गुजरात के दंगे पर लिखी जाएगी। वह दर्द और दुख जहाँ जिन लोगों का है वह पूरी जमात को जगा देगा, उकसाएगा उसे पीना सांप के समान। -नामवर सिंह

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    Devendra

    देवेन्द्र

    जन्म : 1 जनवरी 1958, गाजीपुर जनपद के पिपनार गाँव में | ढेर सारा समय लखीमपुर में अध्यापन और अब लखनऊ में |

    सम्मान :

    1996 में प्रकाशित पहले कहानी संग्रह शहर कोतवाल की कविता पर इंदु शर्मा कथा सम्मान, यशपाल कथा सम्मान और सावित्री देवी फाउंडेशन का हिंदी कथा सम्मान |

    रचना कर्म :

    वर्ष 2016 में दूसरा कहानी संग्रह "समय-वे-समय" |

    इसी बीच समकालीन हिंदी कविता पर आलोचना की एक पुस्तक भी प्रकाशित हुई |

    संपर्क : 569 च/498, प्रेम नगर, आलमबाग, लखनऊ

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