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Nirala Ki Kavitayen Aur Kavyabhasha

Nirala Ki Kavitayen Aur Kavyabhasha

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  • Pages: 208
  • Year: 2015, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352210640
  •  
    प्रस्तुत पुस्तक में काव्यभाषा के संवेदनात्मक स्तर पर रचना-प्रक्रिया के जटिल और संशिलष्ट स्वरुप के परिक्षण का प्रयत्न किया गया है ! निराला की स्थिति सभी छायावादी कवियों में विशिष्ट रही है ! उनका काव्य-व्यक्तित्व सबसे अधिक गत्यात्मक, प्रखर तथा अन्वेषी रहा है, जिसका जिवंत साक्ष्य प्रस्तुत करती है उनकी काव्यभाषा ! काव्यभाषा को लेकर निराला के मानस में रचनात्मक बेचैनी उनके विविध और गतिशील भाषा-स्टारों में देखि जा सकती है ! व्यक्ति के रूप में तो एक लम्बे अरसे तक वे उपेक्षित रहे, कवि के रूप में भी उनकी प्रतिभा को सही रूप में बहुत समय तक नहीं पहचाना गया ! बाहर मैं कर दिया गया हूँ ! भीतर, पर, भर दिया गया हूँ, में कवि के इस मानसिक द्वंद्व की ध्वनि सुनी जा सकती है !

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    Rekha Khare

    रेखा खरे

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