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Panchtantra Ki Kahaniyan

Panchtantra Ki Kahaniyan

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  • Pages: 264p
  • Year: 2008
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 10: 8180310337
  •  
    पंचतंत्र के रचयिता विष्णु शर्मा का जीवनचरित हमें भले ही न ज्ञात हो, किन्तु उसके व्यक्तित्व पर प्रकाश डालने वाली विपुल सामग्री पंचतंत्र में विद्यमान है । यह निश्चित है कि वह एक परम बुद्धिमान, पण्डित, निर्लोभ तथा स्वाभिमानी स्मार्त ब्राह्मण थे, जैसा कि उन्होंने ग्रंथारंभ में ही ब्रह्मा, शिव, कार्त्तिकेय, विष्णु, वरुण, यमराज, अग्नि, इन्द्र, कुबेर, चन्द्रमा, सूर्य, सरस्वती, अश्विनी कुमार, चण्डिका, प्रभूति आर्य देवताओं को तथा आर्यों की परम्परा के ही अनुसार समुद्र, नदी, तीर्थस्थल, वेद, यज्ञादि को नमस्कार किया है । विष्णु शर्मा का स्वभाव अत्यन्त उदार, परदु :खकातर तथा स्वाभिमानी था; किन्तु उन्हें छल-छिद्र एवं दम्भपाखण्ड की भी पूरी जानकारी थी । मानव प्रकृति के सभी रहस्यों की बात तो जाने दीजिए, वह पशु-पक्षियों तथा कीट-पतंगों के स्वभाव एवं जीवन के भी पारखी थे । यद्यपि उनके इस प्रकार के पात्रों में मानव जीवन की घटनाओं का ही गुंफन हुआ है, तथापि उनके सहज स्वभाव एवं प्रकृति का चित्रण अत्यन्त सूक्ष्म तथा मनोरंजक है । वह न केवल समग्र शास्त्रों के ही पण्डित थे, वरन् सांसारिक व्यवहारों का भी उन्हें प्रगाढ़ अनुभव था । रणनीति और कूटनीति में भी वह परम निपुण थे । ... पंचतन्त्र की कथाओं की विशेषता सबसे बढ्‌कर यह है कि वे बहुत छोटी-छोटी हैं, किन्तु उनमें समाज-नीति, शिक्षा, मनोरंजन और कहानीपन के कुतूहल का सम्मिश्रण इतने सुन्दर ढंग से हुआ है कि पाठक आनन्दविभोर होकर सब- कुछ भूल जाता है। एक कहानी के भीतर अनेक छोटी-छोटी कहानियों का सम्बन्ध इतनी निपुणता से जोड़ा गया है कि कहीं अस्वाभाविकता अथवा ऊब को स्थान नहीं मिलता। यही दशा विविध नीतियों से सम्बन्ध रखनेवाले उन सैकड़ों श्लोकों का है, जो फुटकर रूप में संस्कृत के विशाल वाङ्‌मय में फैलकर उसकी शोभा बढ़ाते हैं और इन कहानियों में आकर इनके जीवन- धन हैं। सहस्रों वर्षों की लम्बी अवधि तक इस विशाल देश की सांस्कृतिक भावधारा में ठोकर खाकर ये श्लोक इतने चिकने और मनोहर बन गये हैं कि सचमुच उनकी उपमा शालग्राम की मूर्तियों से की जा सकती है। गौरवमयी भारतीय संस्कृति का संक्षेप में परिचय देने की क्षमता कितनी अधिक उन श्लोकों में है, इसका परिचय अनुभवी ही दे सकते हैं? गागर में सागर भरने की उक्ति उन श्लोकों के लिए पूर्णत: सत्य सिद्ध हुई है। धर्मशास्त्र, राजनीति, आचार, वर्णाश्रम-व्यवस्था, कूटनीति, समाज-विज्ञान आदि विषयों के अनेक ग्रन्थों का निचोड़ उन श्लोकों में भरा हुआ है और वे ही श्लोक पंचतन्त्र की कहानियों में सुन्दर ढंग से इस प्रकार समलंकृत किये गये हैं कि कहीं भी अस्वाभाविकता अथवा कृत्रिमता का बोध नहीं होता।

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