• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Parimal : Smritiyan Aur Dastavej

Parimal : Smritiyan Aur Dastavej

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 325

Special Price Rs. 292

10%

  • Pages: 342p
  • Year: 2003
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: PSAD233
  •  
    आजादी के बाद कला और संस्कृति के क्षेत्र में जो बदलाव हुए उनसे हिंदी साहित्य में बड़े महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए | इन महत्वपूर्ण परिवर्तनों के केंद्र में पांचवें और छठवें दशक ने काफी बदलाव दर्ज किये जिनके मोल स्वरुप को आज के हिंदी साहित्य जगत की आपसी प्रतिस्पर्द्धा और अनर्गल प्रचार ने धूमिल कर रखा है | इन मूलभूत बदलावों के केंद्र में प्रायः इलाहबाद की साहित्यिक संस्था 'परिमल' ने बहुतेरे मूल्यगत परिवर्तनों की शुरुआत की | ये बदलाव का काम किसी योजनाबद्ध तरीके से नहीं किया गया, बल्कि कुछ मनमौजी अलमस्त युवकों ने मिलजुल कर एक साहित्यिक संस्था बनाई जिसका नाम 'परिमल' रखा | अब आज इतना वक्त बीत जाने पर उस संस्था के कार्यों का जैसा महत्व एतिहासिक दृष्टि से बन गया है वह अपने में ही एक अचरज का विषय है | इसको लेकर जितने किस्म की छोटी और घटिया बातों का प्रचार ईर्ष्यालु लेखकों ने इधर चला रखा है उससे यह जरूरी हो गया कि 'परिमल' के एकाध लेखक जो बचे-खुचे रह गये हैं वे भ्रमों का निराकरण करें और सही तथ्यों को सामने रख कर 'परिमल' की आश्चर्यजनक उपस्थिति का इतिहासपरक ब्यौरा सामने रख दें | ये कोशिश जो हिंदी साहित्य के एक अत्यंत विवादस्पद बन चुकी घटना का सही विवरण दे रही है उसका अपने स्थान पर सही मूल्याङ्कन हो सकेगा, ऐसा हमारा विश्वास है |

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Keshavchandra Verma

    केशवचन्द्र वर्मा

    हिंदी साहित्य जगत में संभवतः श्री केशवचन्द्र वर्मा उन अकेले लोगों में हैं जिन्होंने अनेक विधाओं में भरपूर कुचलता के साथ अपनी लेखनी चलाई है | जिस अनुशासन के साथ उन्होंने हिंदी का व्यंग्य साहित्य - कथा, निबंध, उपन्यास, नाटक सभी क्षेत्रों में बहुचर्चित कृतियाँ बड़े सहस के साथ प्रस्तुत किन, जैसा उन्होंने संगीत के बारे में नए ढंग और शैल्यों में लिखा, वह सब देखने वाले अचरज में पद जाते हैं | उनकी कविताएँ एक अलग रस की अनुभूति कराती हैं | परिमल जैसी साहित्यिक संस्था गठित करके उसको पच्चीस तीस साल चलाने के बाद अब वे इस बात के अधिकारी हैं कि वे परिमल का प्रमाणिक इतिहास लिख कर तमाम अनर्गल भ्रमो को दूर करने का दायित्व उठाएँ | केशव जी की अब तक पचास से ऊपर कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं उन सब का नामोल्लेख करना यहाँ अनावश्यक है |

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144