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Prayagraj Aur Kumbh

Prayagraj Aur Kumbh

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  • Pages: 261
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789388211512
  •  
    प्रयागराज को तीर्थराज कहा गया है । यह भारत का सर्वप्रमुख सांस्कृतिक केन्द्र होने के साथ ही भारतीय सात्विकता का सर्वोत्तम प्रतीक भी है । यह हिन्दू-आस्था का एक महान केन्द्र तो है ही, यह हमारे देश की धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना का केन्द्रबिन्दु भी है । प्रयागराज के माहात्म्य का विस्तृत वर्णन मत्स्य, पद्म और कूर्म पुराण के कई अध्यायों में मिलता है । कुम्भ के दौरान संगम तीर्थ पर एक स्नान-दिवस पर भक्तिभाव से कई बार इतने लोग जमा हो जाते हैं कि उनकी संख्या दुनिया के कई देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक होती है । उन श्रद्धालुओं को कभी कोई निमन्त्रण नहीं देता, वे श्रद्धा और भक्ति की एक अदृश्य डोर में बँधकर वहॉ खिंचे चले आते हैं । हमारी सनातन सस्कृति का यह चुम्बकीय आकर्षण अनादिकाल से यथावत बना हुआ है । श्रद्धा और आस्था का यह आवेग सदियों से चली आ रही हमारी परम्परा का हिस्सा है । यह परम्परा हमें अपनी मूल संस्कृति से जोडे रखने के साथ ही सांस्कृतिक एकीकरण का पथ भी प्रशस्त करती है । स्वाभाविक रूप से प्रयागराज और कुम्भ के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानना-समझना एक सुखद अनुभूति है । बहरहाल, अभिलेखीय और साहित्यिक स्रोतों के आधार पर प्रयागराज और कुम्भ के गौरवशाली इतिहास को इस पुस्तक में बहुत ही सरस ढंग से प्रस्तुत किया गया है । इसमें प्रामाणिकता और रोचकता का मणि-कांचन संयोग है । यह पुस्तक हमारे देश के सांस्कृतिक वैभव की एक अभिनव गाथा लेकर आयी है ।

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    Kumar Nirmalendu

    कुमार निर्मलेन्दु

    जन्म : 21 अक्टूबर, 1967 को बिहार में मुंगेर प्रमण्डल के शेखपुरा जिलान्तर्गत सादिकपुर नामक गॉव में ।

    शिक्षा : इतिहास विषय से एम.ए. ।

    गतिविधियाँ : विगत तो दशकों से राजकीय सेवा में । वर्तमान में उत्तर प्रदेश खादूय एवं रसद विभाग में राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत ।

    साहित्य सेवा : हिन्दी साहित्य और इतिहास दोनों ही विषयों में समान रूप से सक्रिय । साहित्य, कला एवं संस्कृति सम्बन्धी विषयों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनियमित लेखन ।

    प्रकाशित और सम्पादित पुस्तकें: 'मगधनामा' तथा ‘उपकार सामान्य हिन्दी, रूपरेखा, व्याकरण एवं प्रयोग' । महात्मा गॉधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी वि.वि. वर्धा के प्रो. कृष्ण कुमार सिह के साथ मिलकर 'प्रेमचन्द: जीवन-दृष्टि और संवेदना' नामक पुस्तक का सम्पादन, डॉ. गणेश पाण्डेय के साथ मिलकर 'यात्रा' नामक एक अनियतकालीन

    साहित्यिक लधु पत्रिका का सम्पादन | कुछ अन्य किताबें प्रकाशन की प्रकिया में ।

    सम्पर्क : जिला आपूर्ति अधिकारी, कौशाम्बी (उत्तर प्रदेश)

    ई-मेल kumarnirmalendu@gmail.com

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