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Rag Milavat Malkauns

Rag Milavat Malkauns

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  • Pages: 184p
  • Year: 2007
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: RMM251
  •  
    राजनीति में नहीं, साहित्य में भी छवि का विशेष महत्त्व स्वीकार किया गया है ! समझ में नहीं आता, नरेश मेहता मैथिलीशरण गुप्त की वैष्णव छवि का अनुसरण कर रहे हैं या अज्ञेय की संभ्रांत छवि का ! अमृत राय आज भी राजकपूर की छवि की याद ताजा करते हैं ! यह दूसरी बात है कि उनके चेहरे पर राजकपूर की मक्खी छाप मूंछे नदारद हैं, जबकि विजयमोहन सिंह ने नामवर छवि का अनुसरण करते हुए चेहरे पर दाढ़ी ली है ! कई बार असली चेहरा छिपाने के लिए यह सब करना ही पड़ता है ! डॉ. जगदीश गुप्त ने अज्ञेय-मुक्तिबोध के प्रभाव में न आकर गणेश जी की छवि को ही सर्वोपरि माना है ! जगदीशजी को स्कूटर पर देखकर हमेशा यही लगता है जैसे गणेशजी चूहे की सवारी कर रहे हैं !

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    Ravinder Kaliya

    जन्म : 11 नवम्बर, 1938; जालन्धर, पंजाब।

    शिक्षा : हिन्दी साहित्य में एम.ए.।

    कुछ समय तक हिसार

    के डिग्री कॉलेज में प्राध्यापन।

    प्रमुख कृतियाँ : ‘खुदा सही सलामत है’, ‘17 रानाडे रोड’, ‘ए.बी.सी.डी.’ (उपन्यास); ‘नौ साल छोटी पत्नी’, ‘सत्ताईस साल की उम्र तक’, ‘गरीबी हटाओ’, ‘चकैया नीम’, ‘ज़रा-सी रोशनी’, ‘गलीकूचे’, ‘रवीन्द्र कालिया की कहानियाँ’ (कहानी); ‘कॉमरेड मोनालिज़ा’, ‘स्मृतियों की जन्मपत्री’, ‘मेरे हमकलम’, ‘सृजन के सहयात्री’, ‘गालिब छुटी शराब’ (संस्मरण); ‘नींद क्यों रात-भर नहीं आती’, ‘तेरा क्या होगा कालिया’, ‘राग मिलावट मालकौंस’ (व्यंग्य)।

    सम्पादन : भारत सरकार द्वारा प्रकाशित ‘भाषा’ का

    सह-सम्पादन। ‘धर्मयुग’ में वरिष्ठ उप-सम्पादक। ‘मेरी प्रिय सम्पादित कहानियाँ’, ‘मोहन राकेश की श्रेष्ठ कहानियाँ’ सहित लगभग पचास पुस्तकों का सम्पादन। ‘वर्तमान साहित्य’ के कहानी महाविशेषांक, ‘साप्ताहिक गंगा यमुना’, ‘वागर्थ’ और ‘नया ज्ञानोदय’ का सम्पादन।

    सम्मान व पुरस्कार : ‘शिरोमणि साहित्य सम्मान’ (पंजाब शासन); ‘राममनोहर लोहिया सम्मान’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’ तथा ‘प्रेमचन्द सम्मान’

    (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान); ‘पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी पुरस्कार’ (मध्य प्रदेश शासन) आदि।

    अन्तरराष्ट्रीय साहित्यिक कार्यक्रमों के सन्दर्भ में अमेरिका, इंग्लैंड, जापान, सूरीनाम, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों की यात्राएँ।

    विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में रचनाएँ शामिल। देश-विदेश की कई भाषाओं में रचनाओं का अनुवाद। विभिन्न सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं के सदस्य रहे रवीन्द्र कालिया ‘भारतीय ज्ञानपीठ’ के पूर्व निदेशक भी थे।

    निधन : 11 जनवरी, 2016

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