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Rachna Ka Antrang

Rachna Ka Antrang

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  • Pages: 167p
  • Year: 2020, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788194272984
  •  
    अर्थशास्त्र जानने वाले कहते हैं कि गाँव की तरक्की हो गयी है। समाजशास्त्र के विद्वान कहते हैं कि रिश्तों में दरार आ गयी है। गाँव के लोग कहते हैं कि अब वह बात नहीं रहीं। बहुत उदास-उदास लगता है। यहाँ रहने का मन नहीं होता। लब्बो-लुबाब यह कि इतनी उदास, मनहूस और कर्ज में डूबी तरक्की। बैंकों की मदद से हमारे गाँव में तीन लोगों ने ट्रैक्टर खरीदे और तीनों के आधे खेत बिक गये। ट्रैक्टर औने-पौने दाम में बेचने पड़े। पता नहीं कर्ज चुकता हुआ कि नहीं? पंचायती राज में लोकतंत्र को गाँवों तक ले जाने का कार्यक्रम बना। फिर तो, अपहरण, हत्याएँ और मुकदमेबाजी। सारे के सारे गाँव थानों और कचहरियों में जाकर कानून की धाराएँ रटने लगे।... 'अस्सी की एक शाम' से

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    Devendra

    देवेन्द्र

    जन्म : 1 जनवरी 1958, गाजीपुर जनपद के पिपनार गाँव में | ढेर सारा समय लखीमपुर में अध्यापन और अब लखनऊ में |

    सम्मान :

    1996 में प्रकाशित पहले कहानी संग्रह शहर कोतवाल की कविता पर इंदु शर्मा कथा सम्मान, यशपाल कथा सम्मान और सावित्री देवी फाउंडेशन का हिंदी कथा सम्मान |

    रचना कर्म :

    वर्ष 2016 में दूसरा कहानी संग्रह "समय-वे-समय" |

    इसी बीच समकालीन हिंदी कविता पर आलोचना की एक पुस्तक भी प्रकाशित हुई |

    संपर्क : 569 च/498, प्रेम नगर, आलमबाग, लखनऊ

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