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Rachnaon Par Chintan

Rachnaon Par Chintan

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  • Pages: 224
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789388211369
  •  
    आंचलिक उपन्यास ‘अलग-अलग वैतरणी, 'सोमामाटी’ और ‘आधा गाँव’ ने यह अहसास दिया हैं कि जीवन की बहुरंगी प्रक्रियाओं के आत्मीय अंकन के लिए जितना उदार फलक आंचलिकता प्रदान करती है, उतना पारम्परिक, शिष्ट, तत्सम जीवन नहीं । इसकी तत्परता में व्यक्ति की पीडा अथवा उसके आन्तरिक संघर्षों के अंकन अथवा मूर्त ऐतिहासिक प्रक्रियाओ का अंकन चाहे जितना भी हो लेकिन जीवन की वह आभा, सामान्य जीवन-प्रक्रिया में ही रचे-पचे होने का सामर्थ्य कम ही दिखता है । इसी कारण शिवप्रसाद सिंह का ‘नीला चाँद’ बौद्धिक प्रयास लगता है । वे दिन, चितकोबरा या शेखर एक जीवनी शिल्प और तकनीक की दृष्टि से जो भी स्थान रखते हों अपनी अंन्तरंगता के बावजूद, उष्माहीन और औपचारिक लगते हैं । इनसे भिन्न मैला आँचल, परती परिकथा, बलचनमा और इस आलेख में सन्दर्भित तीनों उपन्यास जीवन को प्रथम तल पर अंकित करते है । इनमें जीवन अधिक और चिंत्तन कम है । लेकिन ‘इतिहासेतर’ और ‘परम इतर' के आग्रही निर्मल वर्मा परम्परा और स्मृतियों की और लौटते है और उन्हें ही निकष मानकर वर्तमान की समालोचना प्रस्तुत करते है । 'गाँधीवाद की शव परीक्षा’ में मशीन को सभ्यता, रोजगार और सस्ते, सर्वसुलभ उत्पादों से जोडा गया था, चकर क्लब में इसे मनुष्यत्व अर्थात् मनुष्य के सत्व से जोडा गया है । अन्धा युग में वर्णित सामाजिक यथार्थ तत्कालीन सामाजिक यथार्थ से मेल नहीं खाता यह मूलतः अतियथार्थवादी है ।

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    P. N. Singh

    डॉ. पी.एन. सिंह

    जन्म : 01 जुलाई 1942, वासुदेवपुर, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

    शिक्षा : एम. ए. (अंग्रेजी), पी-एच.डी.

    गतिविधियाँ : ज्ञानभारती विद्यापीठ, कोलकाता 1964-68, महाराजा वीर विक्रम शासकीय कॉलेज अगरतला 1968-71, स्नातकोत्तर महाविद्यालय गाजीपुर में 1971 से 2002 तक विभागाध्यक्ष अंग्रेजी विभाग ।

    प्रकाशित साहित्य :

    भारतीय वाल्तेयर और मार्क्स: बी.आर. अम्बेडकर, मण्डल आयोग: एक विश्लेषण; नायपॉल का भारत, गॉधी अम्बेडकर लोहिया, उच्चशिक्षा का संकट : समस्या और समाधान के बिन्दु, निष्प्रभ आईना (कविता-संग्रह),

    रामविलास शर्मा और हिन्दी जाति, अम्बेडकर प्रेमचंद और दलित समाज, हिन्दी दलित साहित्य: संवेदना और विमर्श, Society, Culture, Literary Theory and Criticism आदि ।

    उत्तर प्रदेश शासन द्वारा पुरस्कृत :

    गॉधी और उनका वर्धा (2012), कुबेरनाथ राय : साहित्यिक सांस्कृतिक दृष्टि (2012), अम्बेडकर चिंतन और हिंदी दलित साहित्य (2009)

    संपादन :

    कर्मयोगी की अविराम यात्रा, उच्च शिक्षा की चुनौतियाँ, प्रभु नारायण सिह : गाजीपुर की दृष्टि में, बुद्धिधर्मी डॉ. सरजू तिवारी इत्यादि पुस्तकों तथा जून 1989 से ‘समकालीन सोच' पत्रिका का सम्पादन ।

    सम्पर्क सूत्र :

    गौतम बुद्ध कॉलोनी, रोजा शाहजुनैद, मालगोदाम रोड, गाजीपुर-233001

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