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Ram Katha

Ram Katha

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  • Pages: 96p
  • Year: 2014
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180319716
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    आदिवासी जनजातियों की बोली हल्बी में रचित 'राम कथा' पुस्तक में सि$र्फ राम की कथा ही नहीं है, बल्कि वह आध्यात्मिक चेतना भी है जिससे जीवन-उद्देश्य के लिए कठिन रास्ते और धुँधली दिशाएँ तय की जा सकती हैं और अपने सपनों के मुताबि$क अपना संसार रचा जा सकता है। इस तरह अँधेरे में जैसे एक रोशनी हो–यह कथा–राम कथा! गोस्वामी तुलसीदास की कृति 'रामचरितमानस' 'भक्ति-शक्ति और मुक्ति' की कृति है। चार सौ वर्षों के बाद भी जन-जन में समाहित इस कृति में 'युग का समय और समय का युग' एक सम्पूर्णता में श्रेष्ठतम सृजन में 'देखने' और 'दिखने' को मिलता है। यह पुस्तक उसी समय-सृजन युग से जुडऩे और जोडऩे की एक सतत प्रक्रिया प्रतीत होती है। यह पुस्तक रामकथा के बहाने हाशिए की जि़न्दगी जी रही जनजातियों के लिए एक सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि भी तैयार करती है कि वही भक्ति सच्ची भक्ति है, जिसमें शक्ति के स्रोत हों और वही शक्ति वास्तविक शक्ति है, जिसमें मुक्ति की सम्भावना हो!

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    Dr. Hiralal Shukla

    Dr. Hiralal Shukla

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