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Rang Raachi

Rang Raachi

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  • Pages: 448p
  • Year: 2015
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352210169
  •  
    मीरां अपना एकतारा और खड़ताल हाथों में लेकर बिना किसी भूमिका के गा उठीं- सिसोदिया वंश के राणा यदि मुझसे रूठ गये हैं तो मेरा क्या कर लेंगे?... मुझे तो गोविन्द का गुण गाना है !... राणा जी रूठकर अपना देश बाख लेंगे ! दुसरे शब्दों में, देश में व्याप्त कुप्रथाओं एवं रूढ़ियों की रक्षा का लेंगे!... किन्तु यदि हरी रूठ जायेंगे तो मैं कुम्हला जाउंगी! अर्थात मेरी भक्ति व्यर्थ चली जाएगी ! मैं लोक-लज्जा की मर्यादा को नहीं मानती!... मैं निर्भय होकर अपनी समझ का नागदा बजाऊँगी!... श्याम नाम रुपी जहाज चलाऊँगी... इस तरह मैं इस भावसागर को पार कर जाऊँगी!... मीरां अपने सांवले गिरधर जी की शरण में है तथा उनके चरणकमलों से लिपटी हुई है!... इस प्रकार मीरां का यह सात्विक विद्रोह ही तो था ! अपनी मान्यताओं के प्रति उनकी दृढ़ता का प्रतीक ! तत्कालीन जूठी लोक मर्यादाओं की बेड़ियों का नकार जो शताब्दियों से स्त्री के पैरों में स्वार्थी पुरुष ने विभिन्न नियम संहिताए रचकर अपने हितलाभ के लिए पहना राखी थीं! मीरां चुनौती दे रही थीं उस सामंती युग में स्त्रियों के सम्मुख कड़ी कुप्रथाओं, कुपराम्पराओं को! वह अपूर्व धैर्य के साथ सामना कर रही थीं लोह कपाटों के पीछे स्त्री को धकेलने और उसे पत्थर की दीवारों की बंदिनी बनाकर रखने, पति के अवसान के बाद जीते जी जलाकर सटी कर देने, न मानने पर स्त्री का मानसिक और दैहिक शोषण करने की पाशविक प्रवृतियों का ! मीरां का सत्याग्रह अपने युग का अनूठा एकाकी आन्दोलन था जिसकी वही अवधारक थीं, वही जनक थीं और वही संचालक! मीरां ने स्त्रियों के संघर्ष के लिए जो सिद्धांत निर्मित किये उन पर सबसे पहले वे ही चलीं!

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    Sudhakar Adeeb

    सुधाकर अदीब

    जन्म : 17 दिसंबर, 1955 फ़ैजाबाद (उ.प्र)

    शिक्षा : हिन्दी साहित्य में एम्.ए. करने के उपरांत 'हिंदी उपन्यासों में प्रशासन' विषय पर एक महत्तपूर्ण एवं चर्चित शोधप्रबंध रचकर पी-एच.डी. की उपाधि अर्जित की !

    गतिविधियाँ : हिंदी साहित्य के साथ इतिहास का भी अध्ययन ! उत्तर प्रदेश सिविल सेवा के विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्य कर चुके डॉ सुधाकर अदीब वर्तमान में निदेशक, उत्तर प्रदेश हिंदी संसथान के पद से 31 दिसंबर, 2015 को सेवानिवृत !

    प्रकाशित साहित्य : चार काव्य-संग्रह, चार कहानी-संग्रह अपरोक्त शोधप्रबंध तथा छः उपन्यास- 'अथ मूषक उवाच, 'चींटे के पर', 'हमारा क्षितिज', 'मम अरण्य', 'शाने तारिख', 'रंग रांची' प्रकाशित हो चुके हैं ! 'कथा विराट' उनका सातवाँ उपन्यास है!

    सम्मान : अनेक सम्मानों एवं पुरस्कारों से समादृत !

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