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Sampurna Soorsagar : Vols. 1-5

Sampurna Soorsagar : Vols. 1-5

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  • Pages: 3232p
  • Year: 2018, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789386863829
  •  
    अष्टछाप वाले प्रसिद्ध सूरदास, महाप्रभु वल्लभाचार्य के शिष्य थे । यह जन्मान्ध थे जो दिल्ली और मथुरा के बीच जनमेजय के नागयज्ञ स्थल पर सीही में पैदा हुए थे । इनका जीवन काल स. 1535 से 1640 वि. है । यह परासौली में रहते थे और गोवर्द्धनगिरी पर स्थापित श्रीनाथ जी के मन्दिर में कीर्तन किया करते थे । यह स्वयं 'सूरसागर' कहे जाते थे और इनके कीर्तन पर्दों का संग्रह भी 'सूरसागर' कहलाया । इसमें केवल 'कृष्णलीला' के पद है । यह कृष्ण लीलात्मक सूरसागर है । इस प्रथम खंड में विनय के पद, गोकुल लीला एवं वृंदावन लीला के कुल 1100 पद हैं। डॉ. किशोरीलाल गुप्त के इस महा कार्य ने सूर सम्बन्धी-समय-समय पर उठी .सभी समस्याओं का समाधान कर दिया है । एक अनुपम और अद्वितीय टीका के साथ ।

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    Kishori Lal Gupt

    किशोरी लाल गुप्त

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