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Sampurna Kahaniyan Markandey

Sampurna Kahaniyan Markandey

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  • Pages: 615
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789386863621
  •  
    मार्कण्डेय का पहला कहानी-संग्रह "पान-फूल' 1954 ई. में प्रकाशित हुआ । हालाँकि मार्कण्डेय ने कहानी लिखना 1948 में ही शुरू कर दिया था । प्रारम्भिक कहानियों में 'रक्तदान’, हैदराबाद निजाम के खिलाफ लड़ रहे किसानों के त्याग और बलिदान पर केन्दित कहानी थी । "गरीबो की बस्ती' , जो मार्कण्डेय की पहली लिखी हुई कहानी है, भारत-पाक विभाजन के बाद बंगाल के साम्प्रदायिक दंगों पर केन्द्रित है । भारत के नये बनते मध्य वर्ग के सांस्कृतिक पिछड़ेपन को रेखांकित करती यह पहली कहानी सिर्फ मार्कण्डेय के सचेत कहानीकार होने को ही नहीं दिखाती बल्कि भारतीय समाज के एक ऐसे यथार्थ को सामने रखती है, जिससे लोकतन्त्र और आधुनिकता का भविष्य तय होना था । मार्कण्डेय ने जितने दलित, स्त्री, किसान, अल्पसंख्यक और हाशिये के समाज के पात्रों को उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि और सजग चेतना के साथ प्रस्तुत किया है, वह प्रेमचन्द की कथा-परम्परा का नवीनीकरण और विस्तार है । सम्पूर्ण कहानियाँ : मार्कण्डेय कर यह संग्रह हिन्दी समाज की वह मुकम्मल तस्वीर पेश करता है जिसमें साहित्य और समाज अन्योन्याश्रित है । अस्वादपरकता के बरक्स ये कहानियाँ महज सफलता की ही नहीं बल्कि सार्थकता की कसौटी की भी माँग करती हैं । इन कहानियों का पढ़ा जाना मार्कण्डेय के कथा सरोकारों के साथ-साथ उनके समय और समाज को जानना भी है । दमकते भारत के बरक्स ये कहानियाँ अँधेरे के भारत का साक्षर भी है ।

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    Markandey

    2 मई, 1930 में बराई गाँव-जिला जौनपुर में जन्में मार्कण्डेय की प्राथमिक शिक्षा गॉव में, आगे  की पढाई प्रतापगढ़ से उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्जित किया ।

    मार्कण्डेय स्वाधीन भारत के कथाकार थे, लेकिन वे गहरे अर्थों में भारतीय सामाजिक चेतना के भी कथाकार रहे है । उन्होंने अपनी कहानी का आरम्भ वहीं से किया जहॉ प्रेमचन्द ने कहानी को छोडा था। प्रेमचन्द की ही तरह मार्कण्डेय भी मूलत: देशज संवेदना के कथाकार थे । प्रेमचन्द की परम्परा से मार्कण्डेय का रिश्ता महज ग्रामीण यथार्थ का ही न होकर उस समूचे सामा-जिल ताने- बाने का भी था जिसके बिना न तो किसी

    पारम्परिक समाज को समझा जा सकता है और न उसके आगत क्री आहटें सुनी जा सकती है । मार्कण्डेय देश के राजनीतिक जनतंत्र का उत्सवीकरण करने के बजाय अपनी कहानियों में उसका सामाजिक और

    आर्थिक क्रिटीक रचते है ।

    कहानियों के अलावा तो उपन्यास 'सेमल के फूल' तथा ‘अग्निबीज’ एकांकी-संग्रह "पत्थर व परछाइयाँ, काव्य-संभ्रह 'सपने तुम्हारे थे' तथा ‘यह पृथ्वी तुम्हें देता हूँ’,  आलोचना ‘कहानी की बात’, ‘नयी कहानी : यथार्थवादी नजरिया, प्रगतिशील साहित्य की जिम्मेदारी, साहित्य संवाद कल्पना में चक्रधर नाम से लिखा गया स्तम्भ ‘चक्रधर की साहित्यकार' नाम से प्रकाशित ।

    निधन : 18 मार्च, 2010 ।

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