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Sant Na Bandhe Ganthari

Sant Na Bandhe Ganthari

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  • Pages: 287p
  • Year: 2020, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789389742428
  •  
    संत न बाँधे गाँठड़ी उपन्यास जीवन और समाज से अभिन्न र्धािमक आस्था-विश्वास, श्रद्धा-भक्ति तथा आध्यात्मिक चेतन के विकास के नाम पर हामरे समक्ष निरन्तर गहराते संकट से न सिर्पâ अवगत कराता है बल्कि अन्धश्रद्धा के खिलाफ हमें जागरूक और सतर्वâ बने रहने की प्रबल प्रेरणा भी देता है। यह उपन्यास वैसे बाबाओं, स्वामियों एवं गुरुओं को ही कटघरे में नहीं लाता बल्कि इसके लिए जनसमाज की अन्धश्रद्धा को भी जिम्मेवार मानता है। अपने ही जैसे किसी इंसान को गुरु और संत के तहत ईश्वर का प्रतिरूप समझ उनकी प्रति अपना तन-मन और धन सर्मिपत कर देना अन्धश्रद्धा नहीं तो और क्या है। उपन्यास की व्यापकता और महत्त्व का परिचायक इसका ऐसा कथ्य और तथ्य है जिसके तहत र्धािमक आध्यात्मिक क्षेत्र के किसी भी पक्ष को ऩजरअन्दाज नहीं किया गया है बल्कि गहराई, बेबाकी और सूक्ष्मता के साथ पूरे परिदृश्य का ऐसा सम्यक और सटीक विश्लेषण हुआ है जिसके तहत दूध का दूध और पानी का पानी की तरह र्धािमक आध्यत्मिक जगत का सत्य और तथ्य, कपट और पाखण्ड तथा योग और भोग सबकुछ स्पष्ट होता चला गया है।

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    Mithileshwar

    मिथिलेश्वर

    जन्म : 31 दिसम्बर, 1950, बैसाडीह, भोजपुर (बिहार)

    शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी. (हिन्दी साहित्य)

    साहित्य-सेवा : कहानी संग्रह-बाबूजी, बंद रास्तों के बीच, दूसरा महाभारत, मेघना का निर्णय, तिरिया जनम, हरिहर काका, एक में अनेक, एक थे प्रो. बी. लाल, भोर होने से पहले, चल खुसरो घर आपने, जमुनी तथा रैन भयी चहुँ देस, मिथिलेश्वर की सम्पूर्ण कहानियाँ तीन खण्डों में।

    उपन्यास-झुनिया, युद्धस्थल, प्रेम न बाड़ी ऊपजै, यह अन्त नहीं, सुरंग में सुबह, माटी कहे कुम्हार से, तेरा संगी कोई नहीं तथा संत न बाँधे गाँठड़ी।

    आत्मकथा-पानी बीच मीन पियासी, कहाँ तक कहें युगों की बात, जाग चेत कुछ करौ उपाई। लोक साहित्य-भोजपुरी लोककथा, भोजपुरी की 51 लोककथाओं की पुनर्रचना। विचार साहित्य-साहित्य की सामयिकता, साहित्य, चिंतन और सृजन। नवसाक्षर एवं बालसाहित्य-उस रात की बात, गाँव के लोग, एक था पंकज। संपादन-'मित्र' अनियतकालीन साहित्यिक पत्रिका।

    पुरस्कार : अखिल भारतीय मुक्तिबोध पुरस्कार, सोवियत लैण्ड नेहरू पुरस्कार, यशपाल पुरस्कार, अमृत पुरस्कार, अखिल भारतीय वीर सिंह देव पुरस्कार तथा श्रीलाल शुक्ल इफ्को स्मृति सम्मान।

    सम्प्रति-सेवानिवृत्त, प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा। सम्पर्क : महराजा हाता, आरा-802301 (बिहार)

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