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  • Pages: 96
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352211623
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    सपनों की होम डिलीवरी नए जमाने के करवट बदलते रिश्तों को केंद्र में रखकर लिखा गया उपन्यास है ! रिश्ता चाहे पति-पत्नी का हो, माता-पिता और संतान का हो या प्रेमी-प्रेमिका का ; ईमानदारी से देखें तो हर रिश्ता नए वक्त के साथ ताल बिठाने की कोशिश कर रहा है ! दोष किसी का नहीं है, शायद हर युग अपने सामाजिक संजाल को ऐसे ही बदलता होगा ! वरिष्ठ हिंदी कथाकार ममता कालिया भी इस उपन्यास में दोषी किसी को नहीं ठहरातीं ! न किसी पात्र का पक्ष लेती हैं, न किसी को आरोपों के कठघरे में खड़ा करती हैं ! सिर्फ उनकी कहानी बयान करती हैं जो एक तरफ अपनी निजी पहचान को तो दूसरी तरफ रिश्तों की ऊष्मा को बचाने की जददोजहद में लगे हुए हैं ! शायद यही वह मूल संघर्ष है जिसमें से आज हम सबको गुजरना पद रहा है ! एक तरफ व्यस्क होती वैयक्तिकता है जिसे अपना निजी स्पेस चाहिए और दूसरी तरफ समाज के पुराने सांचे हैं जिनमे यह चीज अंट नहीं पाती ! नतीजा भीतर-बाहर की टूट-फूट और यंत्रणा ! उपन्यास की नायिका रुचि एक असफल विवाह से निकलकर अपनी खुद की पहचान अर्जित करती है ! दूसरी तरफ सर्वेश है ! वह भी अपने पहले विवाह से बाहर आ चूका है ! दोनों का अपना एक-एक बच्चा भी है ! और संयोग कि रुचि का अपना बेटा पारिवारिक टूटन के कारण जिस खतरनाक रास्ते पर जा रहा है उसी रास्ते पर चलता हुआ सर्वेश का बेटा पहले ही जीवन से हाथ धो चूका है ! यही बिंदु इन दोनों के निजी स्पेस को स्थायी रूप से जोड़कर एक नया, बड़ा स्पेस बनाता है ! अत्यन्त पठनीय और सारगर्भित उपन्यास !

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    Mamta Kaliya

    ममता कालिया

    ममता कालिया का जन्म 2 नवम्बर, 1940 को बृन्दावन में  हुआ । शिक्षा दिल्ली, मुम्बई, पुणे, नागपुर और इन्दौर में ।  कहानी, नाटक, उपन्यास, निबन्ध, कविता और पत्रकारिता  अर्थात साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन । हिन्दी  कहानी के परिदृश्य पर उनकी उपस्थिति सातवें दशक से  निरन्तर बनी हुई है । वे महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी  विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका 'हिन्दी' की सम्पादक  रही हैं ।

    दो खडॉ में अब तक को सम्पूर्ण कहानियों ममता कालिया र्का कहानियाँ शीर्षक से प्रकाशित हैं । बेघर, नरक दर नरक, प्रेम कहानी, छुटकारा, दौड़, प्रतिदिन, उसका यौवन, आपकी छोटी लड़की, दुक्खम सुक्खम चर्चित पुस्तकें हैं ।

    अंग्रेजी में ट्रिब्यूट टू पापा एंड अदर पोयम्स प्रकाशित है । कई राष्ट्रीय सम्मानों से विभूषित । हिन्दी को चर्चित रचनाकार ।

    सम्पर्क : बी 3ए /3/3, सुशान्त एक्वापोलिस, क्रॉसिंग रिपब्लिक के सामने, एन. एच. 24, गाजियाबाद- 203016

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