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Shreshth Bharatiya Ekanki : Vol. 1

Shreshth Bharatiya Ekanki : Vol. 1

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  • Pages: 719p
  • Year: 2016, 4th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352211487
  •  
    आज रंगमंच के उपयुक्त सशक्त नाटकों की शायद सबसे अधिक आवश्यकता है। क्योंकि टी.वी. और फिल्मों द्वारा फैलाए गए प्रदूषण को सशक्त नाटक ही सही चुनौती दे सकते है, परन्तु इस दृष्टि इ वर्तमान परिदृश्य बहुत आशाजनक दिखाई नहीं पड़ता। विभिन्न भारतीय भाषाओँ में अच्छे नाटकों का लगातार अभाव होता जा रहा है। ऐसी स्तिथि में यह बहुत आवश्यक है कि भारतीय भाषाओँ में रंगमंच के योग्य उत्कृष्ट नाटकों का परस्पर आदान-प्रदान हो। इस तरह का एक प्रयत्न भारतीय भाषा परिषद् द्वारा किया जा रहा है। दो खंडो में प्रकाशित 'श्रेष्ठ भारतीय एकांकी : खंड-एक' में ओडिया, बांग्ला, कन्नड़, मराठी और हिंदी के श्रेष्ठ एकांकी संकलित है। इसमें रंगमंच के उपयुक्त एकांकी ही प्रायः चुने गए हैं। विभिन्न विभागों का संपादन सम्बंधित भाषाओँ के अधिकारी विद्वानों द्वारा किया गया है। उन्होंने भूमिकाओं में अपनी-अपनी भाषा के नाटक और एकांकी साहित्य के विकास और विशिष्टताओं का गहरा विवेचन किया है। इनसे पाठकों को सम्बंधित भाषाओँ के अवदान की पर्याप्त जानकारी मिल सकेगी। एकांकियों के हिंदी अनुवाद अत्यंत प्रमाणिक अनुवादकों द्वारा करवाए गए हैं, ताकि नाटक के कथ्य और नाट्य-भाषा दोनों की रक्षा की जा सके। 'एकांकी' विधा एक तरह से वर्तमान युग का अवदान और आन्दोलन है। अपने समय की ज्वलन्त समस्याएँ और चिन्ताएं इनके मूल में होती हैं। ऐसी कृतियाँ एक बड़े पाठक और दर्शक समाज के सम्मुख प्रस्तुत करना आज हमारे समय की मांग है। आशा है यह संकलन इन अर्थ में भी उपादेय होगा।

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    Prabhakar Shrotriya

    प्रख्यात आलोचक, नाटककार, निबन्धकार। प्रखर संतुलित : ष्टि। सर्जनात्मक भाषा और विवेचना की मौलिक भंगिमा। नई कविता का सौन्दर्यशास्त्र, नई और समकालीन  कविता  का  प्रामाणिक  मूल्यांकन, साहित्येतिहास का पुनर्मूल्यन, छायावाद, द्विवेदी-युग, प्रगतिवाद इत्यादि का नव विवेचन। दो दर्जन मौलिक और एक दर्जन सम्पादित ग्रंथ।

    प्रमुख प्रकाशन: कविता की तीसरी आँख, रचना एक यातना है, जयशंकर प्रसाद की प्रासंगिकता, संवाद (नई कविता-आलोचना), कालयात्री है कविता, अतीत के हंस: मैथिलीशरण गुप्त, प्रसाद साहित्य में प्रेमतत्त्व, हिन्दी कविता की प्रगतिशील भूमिका, शमशेर बहादुर सिंह, नरेश मेहता, सुमन: मनुष्य और सृष्टा, रामविलास शर्मा: व्यक्ति और कवि तथा धर्मवीर भारती  (संपा.), कविता की तीसरी आँख का अंग्रेजी अनुवाद ज्ीम फनपदजमेेमदबम व िच्वमजतल। नाटक: इला, साँच कहूँ तो..., फिर से जहाँपनाह। इला का ग्यारह भारतीय भाषाओं में अनुवाद (प्रक्रिया में)।

    सम्मान व पुरस्कार: अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान), अ.भा. रामकृष्ण बेनीपुरी पुरस्कार (बिहार सरकार, भाषा विभाग), आचार्य नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार (मध्य प्रदेश साहित्य परिषद), रामेश्वर गुरु पत्रकारिता पुरस्कार, श्री शरद सम्मान, आदि।

    पूर्व कार्य: निदेशक भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता; सम्पादक: वागर्थ, साक्षात्कार, अक्षरा, सदस्य केन्द्रीय साहित्य अकादमी।

    विदेश यात्रा: नार्वे।

    सम्प्रति: निदेशक, भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली; संपादक ‘नया ज्ञानोदय’।

    सदस्य: विद्या परिषद महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय।

    परामर्शदाता: केन्द्रीय साहित्य अकादेमी (हूज. हू. हिंदी), नेशनल बुक ट्रस्ट, दिल्ली लक्ष्मीदेवी ललित कला अकादमी, कानपुर।

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