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Siddh Sahitya

Siddh Sahitya

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  • Pages: 415p
  • Year: 2016, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352210268
  •  
    बौद्ध-सिद्धों और पत्रों की सामाजिक स्थिति में भी एक बहुत बडा अंतर आ चुका था । 8 वीं शताब्दी में तांत्रिक आन्दोलनों के अध्ययन से प्रतीत होता था कि सारे देश में संकीर्ण 'जाति-व्यवस्था और शुद्धतावादी अमीर-पद्धति के विरुद्ध एक व्यापक विद्रोह जाग उठा था और निम्न वर्ग की जातियाँ उस समय सशक्त और जागरूक थी । अत: एक ओर ये सन्त एक पराजित और सामाजिक अन्य से पीडित वर्ग के प्रतीक थे, दूसरी ओर ये तांत्रिक विद्रोह के खोखलेपन से भी परिचित थे और तीसरी ओर यवनों की मजहबी कटूटरता का भी स्वागत नहीं कर पाते थे और चौथी ओर वैष्णव भज-साधना के प्रति आकर्षित होते हुए भी उनके अवतारवाद को ये तर्कसम्मत नहीं मानते थे । सिद्ध-साहित्य का यह अध्ययन एक ओर उन कई जटिलताओं का समाधान करता है जो अभी तक पत्रों और नाथयोगियों के अध्ययन में बाधक सिद्ध होती रही है, दूसरी ओर वह अनादिकाल और मध्यकाल के सर्वथा नये मूल्यांकन के लिए एक भूमिका भी प्रस्तुत करता है ।

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    Dharmveer Bharti

    धर्मवीर भारती
    जन्म : 25 दिसम्बर, 1926 को इलाहाबाद के अतरसुइया मोहल्ले में । शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए. तथा एम.ए की शिक्षा प्राप्त की । गतिविधियाँ: इलाहाबाद विश्वविध्यालय में अध्यापन । तदुपरान्त कईं पत्रिकाओं में लेखन कार्य से जुडे । कुछ समय तक हिंन्दुस्तानी एकेडेमी में भी कार्यरत रहे । इसके बाद साहित्यिक पत्रिका 'निकष' तथा 'धर्मयुग' पत्रिका का सम्पादन लम्बे अरसे तक किया । वे प्रगतिशील लेखक संघ के मंत्री भी रहे । साहित्य सेवा : डॉ. धर्मवीर भारती प्रतिभाशाली लेखकों में विख्यात थे । उपन्यास, कहानी, कविता, नाटक, निबन्ध, आलोचना,
    अनुवाद तथा रिपोर्तज इत्यादि विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान किया । 'बन्द गली का आखिरी मकान', 'पश्यन्ती' , 'कुछ चेहरे कुछ चिंतन, 'कहनी अनकहनी', 'शब्दिता' तथा 'गुनाहों का देवता' उनकी महत्त्वपूर्ण और चर्चित कृतियाँ हैं । पुरस्कार : युवावस्था में शिक्षा के दौरान 'चिन्तामणि गोल्ड मेडल' । महाराष्ट्र सरकार द्वारा 'महाराष्ट्र गौरव' की उपाधि तथा भारत सरकार द्वारा 'पद्मश्री' सम्मान से विभूषित । देहावसान : 4 सितम्बर, 1997 ई. ।

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